प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 अप्रैल 2026 को फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों पर खरीफ मौसम 2026 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) की दरों को मंजूरी दी, जो 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगी। खरीफ मौसम के लिए अनुमानित बजटीय व्यय लगभग 41,533.81 करोड़ रुपये है जो खरीफ 2025 की तुलना में लगभग 4,317 करोड़ रुपये अधिक है, अर्थात पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक व्यवधानों से बढ़ती अंतरराष्ट्रीय उर्वरक एवं कच्चे माल की कीमतों की भरपाई के लिए लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। संशोधित संरचना के अंतर्गत नाइट्रोजन पर प्रति किलोग्राम सब्सिडी 47.32 रुपये, फॉस्फोरस पर 52.76 रुपये, पोटाश पर 2.38 रुपये (स्थिर) और सल्फर पर 3.16 रुपये निर्धारित की गई है। यह योजना डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), मोनो-अमोनियम फॉस्फेट (एमएपी), म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी), ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (टीएसपी), सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी), कॉम्प्लेक्स उर्वरकों एवं सूक्ष्म पोषक तत्व-संवर्धित संस्करणों सहित पी एंड के उर्वरकों के 28 ग्रेड पर लागू होती है। उर्वरक विभाग अप्रैल 2010 से एनबीएस योजना को प्रत्येक प्रमुख पोषक तत्व के लिए प्रति किलोग्राम आधार पर संचालित कर रहा है ताकि कंपनियाँ पी एंड के उर्वरकों का आयात या निर्माण कर बाजार दरों पर बेच सकें, जबकि सब्सिडी प्रमाणीकृत पॉइंट ऑफ सेल के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली से दी जाती है। अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय खरीफ बुवाई के दौरान किसानों को समय पर और किफायती कीमत पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, खुदरा कीमतों को स्थिर रखता है और मानसून से पहले खाद्य सुरक्षा की रक्षा करता है। 50 किलोग्राम डीएपी के बैग की अधिकतम खुदरा कीमत 1,350 रुपये पर कायम रखी गई है।