प्रकाशित: 28 नवंबर 2025समाचार स्रोतटॉपिक
भारतीय नौसेना को आईएनएस तारागिरि मिला — परियोजना 17ए का चौथा नीलगिरि-श्रेणी स्टील्थ फ्रिगेट
भारतीय नौसेना ने 28 नवंबर 2025 को मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) से आईएनएस तारागिरि प्राप्त किया। यह नीलगिरि-श्रेणी का चौथा स्वदेशी उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे परियोजना 17ए के तहत बनाया गया है। यह युद्धपोतों के डिज़ाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
प्रमुख तथ्यः इसका निर्माण 81 महीनों में हुआ, जबकि इस श्रेणी के पहले जहाज आईएनएस नीलगिरि को बनाने में 93 महीने लगे थे। इसमें 75% स्वदेशी सामग्री है और इसके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) शामिल रहे। इससे लगभग 4,000 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा हुए। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइलों, निगरानी, लक्ष्य-अनुसरण और मार्गदर्शन के लिए बहु-कार्य रडार (MFSTAR) तथा संयुक्त डीज़ल या गैस प्रणोदन प्रणाली (CODOG) से लैस है। इसका नाम लिएंडर-श्रेणी के उस पुराने फ्रिगेट के नाम पर रखा गया है, जिसने 1980-2013 तक सेवा दी थी। इसे 3 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया। परियोजना 17ए के शेष तीन जहाजों को अगस्त 2026 तक सौंपने की योजना है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारतीय नौसेना को परियोजना 17ए के तहत बने नीलगिरि-श्रेणी के चौथे स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि की सुपुर्दगी के रणनीतिक और औद्योगिक महत्त्व का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारतीय नौसेना ने 28 नवंबर 2025 को मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स से परियोजना 17ए के तहत बना नीलगिरि-श्रेणी का चौथा स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि प्राप्त किया। 81 महीनों में बने इस जहाज में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है। इसके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल रहे, जिससे 4,000 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा हुए। यह ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस है और इसे 3 अप्रैल 2026 को कमीशन किया गया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय नौसेना ने आईएनएस तारागिरि कब और कहाँ प्राप्त किया?
भारतीय नौसेना ने 28 नवंबर 2025 को मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) से आईएनएस तारागिरि प्राप्त किया।
नीलगिरि-श्रेणी में आईएनएस तारागिरि का स्थान क्या है?
आईएनएस तारागिरि नीलगिरि-श्रेणी का चौथा स्वदेशी उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे परियोजना 17ए के तहत बनाया गया है। यह युद्धपोतों के डिज़ाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
आईएनएस तारागिरि से जुड़े औद्योगिक और रोज़गार के आँकड़े क्या हैं?
इसे 81 महीनों में बनाया गया, जबकि इस श्रेणी के पहले जहाज आईएनएस नीलगिरि को बनाने में 93 महीने लगे थे। इसमें 75% स्वदेशी सामग्री है, इसके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) शामिल रहे तथा इससे लगभग 4,000 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा हुए।
आईएनएस तारागिरि में कौन-सी प्रणालियाँ हैं और आगे का कार्यक्रम क्या है?
यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइलों, निगरानी, लक्ष्य-अनुसरण और मार्गदर्शन के लिए बहु-कार्य रडार (MFSTAR) तथा संयुक्त डीज़ल या गैस प्रणोदन प्रणाली (CODOG) से लैस है। इसे 3 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया और परियोजना 17ए के शेष तीन जहाजों को अगस्त 2026 तक सौंपने की योजना है।