भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित अपने केंद्र में CE20 क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का एक महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक किया। इस दौरान इंजन समुद्र तल पर 165 सेकंड तक पूरी शक्ति से चला। CE20 का उपयोग LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) रॉकेट के ऊपरी चरण में होता है। यह रॉकेट चंद्रयान मिशनों सहित भारत के सबसे भारी पेलोड को कक्षा में पहुँचाता है। समुद्र तल पर पूरी शक्ति से क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण खास महत्व रखता है, क्योंकि इन इंजनों को निर्वात में काम करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। यह उपलब्धि ISRO की तकनीकी क्षमता को स्पष्ट रूप से दिखाती है। सफल परीक्षण गगनयान कार्यक्रम के तहत भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है। केंद्रीय बजट 2026-27 में अंतरिक्ष विभाग के लिए ₹13,705.63 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के अनुमान से 2.16% अधिक है। भारत अंतरिक्ष से निगरानी की क्षमता बढ़ाने के लिए अगले पाँच वर्षों में 52 उपग्रहों का समूह भी विकसित कर रहा है। साथ ही, मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) के तहत 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभियानों को मलबा-मुक्त बनाने का काम जारी है।
ISRO ने समुद्र तल पर CE20 क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का 165 सेकंड का सफल पूर्ण-शक्ति परीक्षण किया
ISRO ने महेंद्रगिरि में समुद्र तल पर CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 165 सेकंड तक पूरी शक्ति से सफल परीक्षण किया। यह गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य तथ्य
- ISRO ने महेंद्रगिरि, तमिलनाडु स्थित अपने केंद्र में समुद्र तल पर CE20 क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का 165 सेकंड का पूर्ण-शक्ति परीक्षण सफलतापूर्वक किया।
- CE20 का उपयोग LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) रॉकेट के ऊपरी चरण में होता है। यह रॉकेट चंद्रयान मिशनों सहित भारत के सबसे भारी पेलोड को कक्षा में पहुँचाता है।
- सफल परीक्षण गगनयान कार्यक्रम के तहत भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में अंतरिक्ष विभाग के लिए ₹13,705.63 करोड़ आवंटित किए गए — यह पिछले वर्ष के अनुमान से 2.16% अधिक है।
- भारत अंतरिक्ष से निगरानी को मज़बूत करने के लिए अगले पाँच वर्षों में 52 उपग्रहों का समूह विकसित कर रहा है। साथ ही, मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) के तहत 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभियानों को मलबा-मुक्त बनाने पर काम हो रहा है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के गगनयान कार्यक्रम के लिए ISRO द्वारा समुद्र तल पर किए गए CE20 क्रायोजेनिक इंजन के 165 सेकंड के पूर्ण-शक्ति परीक्षण के रणनीतिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में समुद्र तल पर 165 सेकंड के पूर्ण-शक्ति परीक्षण ने दिखाया कि निर्वात में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया CE20 क्रायोजेनिक इंजन विश्वसनीय है। इसका उपयोग LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) के ऊपरी चरण में होता है। इससे गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी पुष्ट हुई। केंद्रीय बजट 2026-27 में अंतरिक्ष विभाग के लिए ₹13,705.63 करोड़ आवंटित किए गए; 2.16% की यह वृद्धि निगरानी के लिए 52 उपग्रहों का समूह विकसित करने में मदद करेगी।
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इसरो ने समुद्र तल पर सीई20 क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का पूर्ण-शक्ति परीक्षण कितनी अवधि तक किया?
इसरो ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में समुद्र तल पर CE20 क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का 165 सेकंड का ऐतिहासिक पूर्ण-शक्ति परीक्षण सफलतापूर्वक किया। यह गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मार्च 2026 में ISRO के CE20 क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण कहाँ हुआ और इससे क्या साबित हुआ?
**ISRO ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि** स्थित अपनी परीक्षण सुविधा में **समुद्र तल पर CE20 क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का 165 सेकंड तक पूरी शक्ति से सफल परीक्षण** किया। यह परीक्षण खास महत्व रखता है, क्योंकि क्रायोजेनिक इंजन निर्वात में काम करने के लिए बनाए जाते हैं। इससे ISRO की तकनीकी क्षमता का स्पष्ट प्रमाण मिला।
ISRO के CE20 क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किस रॉकेट में होता है और उस रॉकेट ने किन मिशनों में भूमिका निभाई है?
**CE20 क्रायोजेनिक इंजन** का उपयोग **LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3)** रॉकेट के **ऊपरी चरण** में होता है। LVM3 भारत के **सबसे भारी पेलोड** को कक्षा में पहुँचाता है। इनमें भारत के चंद्र-अन्वेषण कार्यक्रम के **चंद्रयान मिशन** भी शामिल हैं।
ISRO का CE20 इंजन परीक्षण गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
**CE20 इंजन का 165 सेकंड का पूर्ण-शक्ति परीक्षण** भारत के आगामी **गगनयान कार्यक्रम** के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन होगा। CE20 से संचालित LVM3 रॉकेट से ही गगनयान के अंतरिक्षयात्रियों को प्रक्षेपित किया जाएगा।
केंद्रीय बजट 2026-27 में अंतरिक्ष विभाग के लिए कितना आवंटन किया गया?
**केंद्रीय बजट 2026-27 में अंतरिक्ष विभाग** के लिए **₹13,705.63 करोड़** आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष के अनुमान से **2.16% अधिक** है। इससे पता चलता है कि सरकार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में लगातार निवेश कर रही है।
भारत का मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) क्या है और निगरानी के लिए कितने उपग्रह विकसित किए जा रहे हैं?
भारत बढ़ते अंतरिक्ष मलबे की समस्या से निपटने के लिए **DFSM के तहत मलबा हटाने** पर काम कर रहा है। साथ ही, अंतरिक्ष से निगरानी की क्षमता बढ़ाने के लिए **अगले पाँच वर्षों में 52 उपग्रहों का समूह** विकसित किया जा रहा है।
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