NISAR विज्ञान और उपयोग कार्यक्रम पर प्रक्षेपण के बाद पहली उपयोगकर्ता बैठक 27 मार्च 2026 को अहमदाबाद के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) में होनी है। NISAR (नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार) उपग्रह NASA और ISRO का संयुक्त मिशन है। इसे 30 जुलाई 2025 को ISRO के भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) से प्रक्षेपित किया गया था और जनवरी 2026 में पूरी तरह परिचालन में घोषित किया गया था।

राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने फरवरी 2026 में तैयार NISAR डेटा की पहली श्रृंखला का उपयोग करके मध्य भारत और सिंधु-गंगा के मैदानों में मिट्टी की नमी के 100 x 100 मीटर रिज़ॉल्यूशन वाले मानचित्र तैयार किए हैं।

NISAR उन्नत रडार इमेजिंग से पृथ्वी के भूभागों और बर्फ़ीले क्षेत्रों की ऊँचाई का 5 से 10 मीटर रिज़ॉल्यूशन पर महीने में 4 से 6 बार मानचित्रण करता है। उपग्रह को पारिस्थितिकी तंत्र में होने वाले व्यवधान, हिमचादरों के टूटने और भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी तथा भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं सहित जटिल प्राकृतिक प्रक्रियाओं का अवलोकन और मापन करने के लिए तैयार किया गया है।

NASA इस मिशन के लिए एल-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार, उच्च-दर दूरसंचार उपतंत्र, GPS रिसीवर, ठोस-अवस्था रिकॉर्डर और पेलोड डेटा उपतंत्र देता है। ISRO उपग्रह बस, एस-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार, प्रक्षेपण यान और उससे जुड़ी प्रक्षेपण सेवाएँ देता है। यह सहयोग भारत-अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष साझेदारियों में से एक है।