NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह को 30 जुलाई 2025 को ISRO के GSLV-F16 रॉकेट से श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। जनवरी 2026 में इसे पूरी तरह सक्रिय घोषित किया गया और तब से यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा दे रहा है। अप्रैल 2026 तक NISAR अपना प्रारंभिक कैलिब्रेशन चरण पूरा कर चुका है और कई महाद्वीपों के लिए विस्तृत पृथ्वी अवलोकन डेटा तैयार कर रहा है। NISAR पहला उपग्रह मिशन है जो दो अलग-अलग रडार आवृत्तियों — L-बैंड (NASA-JPL द्वारा) और S-बैंड (ISRO द्वारा) — का उपयोग करता है, जिससे पृथ्वी की सतह में 1 सेमी तक के परिवर्तनों को मापा जा सकता है। इससे भूकंप से होने वाली भू-विकृति, ज्वालामुखी गतिविधि, हिमनद गति, भूमि अवसादन और कृषि परिवर्तनों की अभूतपूर्व निगरानी संभव है। मार्च 2026 में NISAR ने अमेरिका में माउंट रेनियर और माउंट सेंट हेलेन्स के आसपास की वनस्पति और सतह विरूपण का विस्तृत अवलोकन किया। इस मिशन का 12-दिन का पुनरावृत्ति चक्र है, जिसमें पूरी पृथ्वी का अवलोकन शामिल है। संसद को अप्रैल 2026 में सूचित किया गया कि PSLV की हाल की विसंगति की जांच राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति कर रही है। NISAR भारत-अमेरिका के बीच अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग है, जिसकी संयुक्त विकास लागत लगभग 1.5 अरब डॉलर है।