भारत ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित एक समारोह में अपनी तीसरी परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिधामन को सेवा में शामिल किया है। यह भारत की परमाणु त्रय क्षमता और पानी के भीतर परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
आईएनएस अरिधामन अरिहंत श्रेणी की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों से संबंधित है और इसमें आठ ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण ट्यूबें लगी हैं, जो 3,500 किलोमीटर की रेंज वाली के-4 पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों या 750 किलोमीटर रेंज वाली के-15 सागरिका मिसाइलों को ले जाने में सक्षम हैं। पनडुब्बी में लगभग 70% स्वदेशी सामग्री है, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि है।
यह सेवा-प्रवेश भारत की द्वितीय प्रहार परमाणु क्षमता को मजबूत करता है, जिसे विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोध के लिए आवश्यक माना जाता है। आईएनएस अरिधामन के साथ भारतीय नौसेना अब तीन एसएसबीएन संचालित करती है — आईएनएस अरिहंत (2016 में सेवा में शामिल), आईएनएस अरिघात (2024 में सेवा में शामिल), और आईएनएस अरिधामन। यह पनडुब्बी लंबे समय तक पानी के नीचे गश्त करने के लिए डिज़ाइन की गई है और इससे भारत की निरंतर समुद्री प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि स्वदेशी पनडुब्बी कार्यक्रम जटिल नौसैनिक इंजीनियरिंग और परमाणु प्रणोदन प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमता को दिखाता है। इससे भारत परमाणु पनडुब्बी बनाने में सक्षम देशों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है।
