भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2016 और 2022 के अपने पूर्व निर्णयों की फिर पुष्टि की। इनके अनुसार आवारा कुत्तों को तय क्षेत्रों में भोजन कराना और पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के तहत उनकी नसबंदी करना अनिवार्य है। न्यायालय ने पशु-कल्याण नीतियाँ लागू कराने में स्थानीय निकायों की ज़िम्मेदारी भी बढ़ाई।

इन निर्देशों में ABC व्यवस्था के तहत नसबंदी और टीकाकरण, तय भोजन क्षेत्रों की व्यवस्था और देखभाल करने वालों को उत्पीड़न से बचाने की बात कही गई है। 20वीं पशुधन गणना में भारत में 1,53,09,355 आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे; एक अलग अनुमान में यह संख्या 6.2 करोड़ बताई गई है। राजस्थान के शहरी स्थानीय निकायों को भी इन निर्देशों का पालन करना होगा।