8 जुलाई 2026 को ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (एनआईयूए) और डाक विभाग के साथ विचार-मंथन बैठक की। बैठक में भारत की डिजिटल पता-प्रणाली, यूएलपीआईएन (हर भूमि पार्सल की विशिष्ट पहचान संख्या) और डिजिपिन के बीच तालमेल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने की। इसमें पी. नरहरि, गोकुल कुलपति और देबोलीना कुंडू सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
शासन की दृष्टि से इस पहल का महत्व दोनों प्रणालियों की पूरक भूमिका में है। यूएलपीआईएन हर ग्रामीण और शहरी भूमि पार्सल को एक अलग डिजिटल पहचान देता है, जबकि डिजिपिन सटीक भू-संदर्भित लोकेशन पहचान को संभव बनाता है। इनके एकीकरण से तालमेल मजबूत होने, सार्वजनिक सेवा वितरण बेहतर होने और भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की व्यापक सोच आगे बढ़ने की उम्मीद है।
बैठक में प्रतिभागियों ने व्यावहारिक उपयोग के मामलों को परखने के लिए पायलट परियोजनाएं शुरू करने पर सहमति दी। सरकारी प्लेटफ़ॉर्मों पर आसान एकीकरण के लिए खुला, मानक-आधारित एपीआई आर्किटेक्चर संयुक्त रूप से विकसित करने पर भी सहमति बनी। यह पहल स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और इनोवेटर्स को नागरिक-केंद्रित भू-स्थानिक ऐप्लिकेशन और वैल्यू-ऐडेड सेवाएं बनाने में मदद करेगी। इस सहयोग को डिजिटल भूमि प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया। प्रशासन के लिए मुख्य संकेत यह है कि भूमि शासन के डिजिटल ईकोसिस्टम को आपस में तालमेल वाला, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा रहा है, जो डिजिटल इंडिया, खुले मानकों, नवाचार और डिजिटल बदलाव के अनुरूप है।
