वॉक्सेलग्रिड्स ने महाराष्ट्र में नागपुर के पास चंद्रपुर कैंसर केयर फाउंडेशन में भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी 1.5-टेस्ला एमआरआई स्कैनर स्थापित किया। यह स्कैनर 25 दिसंबर 2025 को आधिकारिक रूप से पेश किया गया और मरीजों की जांच में इस्तेमाल हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी परीक्षा-उपयोगी बात यह है कि यह केवल असेंबली नहीं, बल्कि देश में डिजाइन और निर्मित उच्च तकनीक वाले चिकित्सा उपकरण की उपलब्धि है। क्लिनिकल इस्तेमाल तक पहुंचना इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे यह अपडेट प्रयोगशाला-स्तर की घोषणा से आगे बढ़कर वास्तविक स्वास्थ्य सेवा से जुड़ता है।

इस स्कैनर की लागत आयातित विकल्पों की तुलना में लगभग 40% कम बताई गई है। वॉक्सेलग्रिड्स की तकनीक में ड्राई मैग्नेट डिजाइन का उल्लेख किया गया है, जिससे तरल हीलियम पर निर्भरता घटती है। भारत जैसे देश में यह महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि उन्नत जांच उपकरण महंगे होने पर जिला अस्पतालों और छोटे स्वास्थ्य केंद्रों तक उनकी पहुंच सीमित रहती है। आयात-निर्भरता घटने से चिकित्सा उपकरण निर्माण, स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषय आपस में जुड़ते हैं।

यह उदाहरण बताता है कि स्वदेशी डिजाइन, कम लागत और तरल हीलियम पर कम निर्भरता स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में कैसे मदद कर सकती है। प्रारंभिक परीक्षा में कंपनी, स्थान, क्षमता यानी 1.5-टेस्ला, लगभग 40% लागत कमी और चंद्रपुर कैंसर केयर फाउंडेशन जैसे सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा के उत्तरों में इसे स्वदेशी नवाचार, चिकित्सा उपकरण निर्माण और सस्ती जांच सेवाओं के उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है। स्थिर तथ्य के रूप में एमआरआई में चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति को टेस्ला में मापना, चिकित्सा इमेजिंग और आयात-प्रतिस्थापन जैसे बिंदु याद रखें।