भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मई 2026 के अंत में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 मिशन के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। इस मिशन में GISAT-1A उपग्रह ले जाया जाएगा, जिसे EOS-05 भी नाम दिया गया है। GISAT-1A लगभग 2,100 किलोग्राम वजनी भू-प्रतिबिंबन पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो भूस्थिर कक्षा से काम करेगा। निम्न पृथ्वी कक्षा के उपग्रह किसी क्षेत्र के ऊपर से केवल समय-समय पर गुजरते हैं, जबकि भूस्थिर कक्षा में स्थित उपग्रह भारतीय उपमहाद्वीप पर लगभग लगातार नजर रख सकता है। इसी कारण GISAT-1A बाढ़, चक्रवात और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा संकटों की तेज निगरानी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि ऐसे समय में प्रतिक्रिया के लिए समय पर चित्र मिलना बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह उपग्रह उच्च-विभेदन वाले बहु-वर्णक्रमीय और अति-वर्णक्रमीय चित्र देने के लिए तैयार किया गया है, जिससे कृषि, वानिकी, जल संसाधन, शहरी विकास और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में मदद मिलेगी। प्रक्षेपण यान भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क II (GSLV Mk II) है, जो भारत द्वारा विकसित सबसे बड़ा परिचालन प्रक्षेपण यान है। यह चार द्रव स्ट्रैप-ऑन मोटरों वाला तीन-चरणीय यान है और इसका तीसरा चरण स्वदेशी रूप से विकसित तथा उड़ान में प्रमाणित क्रायोजेनिक अपर स्टेज (CUS) का उपयोग करता है। यह मिशन जनवरी में इसरो के 2026 के पहले प्रक्षेपण में PSLV-C62 के तीसरे चरण की विफलता के बाद आ रहा है, इसलिए GSLV-F17 की सफल उड़ान भरोसा बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। भू-प्रतिबिंबन क्षमता भारत के आपदा प्रबंधन, कृषि नियोजन और संसाधन निगरानी अवसंरचना को काफी मजबूत करती है तथा देश के अंतरिक्ष-आधारित शासन और पूर्व-चेतावनी तंत्र में योगदान देती है।
इसरो मई 2026 के अंत में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से तत्काल पृथ्वी अवलोकन और आपदा निगरानी के लिए GISAT-1A (EOS-05) भू-प्रतिबिंबन उपग्रह ले जाने वाले GSLV-F17 मिशन को प्रक्षेपित करने की तैयारी कर रहा है
इसरो मई 2026 के अंत में श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 मिशन प्रक्षेपित करने की तैयारी कर रहा है। यह मिशन भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग निरंतर पृथ्वी अवलोकन और आपदा निगरानी के लिए GISAT-1A (EOS-05) भू-चित्रण उपग्रह (लगभग 2,100 किग्रा) को भूस्थिर कक्षा में ले जाएगा।
मुख्य तथ्य
- इसरो मई 2026 के अंत में श्रीहरिकोटा से GISAT-1A (EOS-05) को ले जाने वाले GSLV-F17 मिशन के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है
- GISAT-1A लगभग 2,100 किग्रा का भू-चित्रण करने वाला पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो भूस्थिर कक्षा से काम करता है
- भूस्थिर स्थिति से तीव्र आपदा निगरानी के लिए भारतीय उपमहाद्वीप का लगभग निरंतर अवलोकन संभव होता है
- यह कृषि, वानिकी, जल और शहरी निगरानी के लिए उच्च विभेदन वाले बहु-वर्णक्रमीय और अति-वर्णक्रमीय चित्र प्रदान करता है
- प्रक्षेपण यान GSLV Mk II तीन-चरणीय यान है, जिसमें चार द्रव स्ट्रैप-ऑन और एक स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज है
- यह मिशन इसरो के जनवरी 2026 के PSLV-C62 प्रक्षेपण में तीसरे चरण की विफलता के बाद हो रहा है, इसलिए यह भरोसा बहाल करने वाली एक महत्वपूर्ण उड़ान बन जाती है
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स्रोत: ISRO
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
GISAT-1A क्या है और इसे कहाँ से प्रक्षेपित किया जाएगा?
GISAT-1A, जिसे EOS-05 नाम भी दिया गया है, लगभग 2,100 किग्रा का भू-इमेजिंग पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसे इसरो मई 2026 के अंत में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 मिशन पर प्रक्षेपित करने की तैयारी कर रहा है।
GISAT-1A के लिए भूस्थिर कक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?
भूस्थिर कक्षा में मौजूद उपग्रह भारतीय उपमहाद्वीप पर लगभग लगातार नज़र रख सकता है, इसलिए बाढ़, चक्रवात और भूस्खलन जैसी आपदाओं की तेज़ निगरानी में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
GISAT-1A मिशन के लिए किस प्रक्षेपण यान का उपयोग किया जाता है?
भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क II (GSLV Mk II), जो चार द्रव स्ट्रैप-ऑन मोटरों और एक स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज वाला तीन-चरणीय यान है।
2026 में इस मिशन से पहले कौन सा झटका लगा था?
इसरो के 2026 के पहले प्रक्षेपण में जनवरी में PSLV-C62 के तीसरे चरण में विफलता आई थी, इसलिए सफल GSLV-F17 उड़ान भरोसा फिर से मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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