मुख्य तथ्य

  • इनकोस्पार 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन बना और इसरो की औपचारिक स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई।
  • 21 नवंबर 1963 को थुम्बा से नाइक-अपाचे साउंडिंग रॉकेट प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की व्यवहारिक शुरुआत माना जाता है।
  • एसएलवी-3 ने 18 जुलाई 1980 को रोहिणी आरएस-1 को कक्षा में स्थापित कर भारत को पहली स्वदेशी कक्षीय सफलता दी।
  • 15 अक्टूबर 1994 की सफल उड़ान के बाद पीएसएलवी इसरो का भरोसेमंद कार्य-यान बना और चंद्रयान-1 तथा मंगलयान भी इसी से गए।
  • 17 मार्च 1988 को छोड़ा गया आईआरएस-1ए भारत का पहला परिचालन सुदूर संवेदन उपग्रह था।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    इनकोस्पार 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन बना और इसरो की औपचारिक स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई।

  2. 2

    21 नवंबर 1963 को थुम्बा से नाइक-अपाचे साउंडिंग रॉकेट प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की व्यवहारिक शुरुआत माना जाता है।

  3. 3

    एसएलवी-3 ने 18 जुलाई 1980 को रोहिणी आरएस-1 को कक्षा में स्थापित कर भारत को पहली स्वदेशी कक्षीय सफलता दी।

  4. 4

    15 अक्टूबर 1994 की सफल उड़ान के बाद पीएसएलवी इसरो का भरोसेमंद कार्य-यान बना और चंद्रयान-1 तथा मंगलयान भी इसी से गए।

  5. 5

    17 मार्च 1988 को छोड़ा गया आईआरएस-1ए भारत का पहला परिचालन सुदूर संवेदन उपग्रह था।

  6. 6

    19 जून 1981 को प्रक्षेपित एप्पल भारत का पहला प्रायोगिक भूस्थिर संचार उपग्रह था।

  7. 7

    डीआरडीओ 1958 में बना और रक्षा अभिकल्पन, परीक्षण, उपयोगकर्ता परीक्षण, उत्पादन-सहयोग तथा सम्मिलन को जोड़ता है।

  8. 8

    जैसलमेर का पोखरण 1974 के स्माइलिंग बुद्धा और 1998 के ऑपरेशन शक्ति से भारत के परमाणु परीक्षण इतिहास का केंद्र है।

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इसरो कब बना और उसकी संगठनात्मक संरचना कैसे विकसित हुई?

इसरो 15 अगस्त 1969 को इनकोस्पार की जगह बना, 1972 में अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग के ढांचे में आया, और आज उपग्रह, प्रक्षेपण, प्रणोदन तथा प्रक्षेपण-अवसंरचना के अलग-अलग केंद्रों वाले राष्ट्रीय अंतरिक्ष संगठन के रूप में काम करता है। इसरो के प्रोफ़ाइल पृष्ठ के अनुसार इसरो 15 अगस्त 1969 को बना और उसने इनकोस्पार का स्थान लिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, यानी इसरो, 1969 में अचानक खड़ा नहीं हुआ था; उसके पीछे 1960 के दशक की संस्थागत और वैज्ञानिक तैयारी थी।

गठन की समयरेखा

वर्ष/तिथिसंस्था/घटनातथ्य
1962इनकोस्पारविक्रम साराभाई के नेतृत्व में परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत इनकोस्पार बनाया गया, ताकि भारत की प्रारंभिक अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों को समन्वित किया जा सके।
21 नवंबर 1963थुम्बा भूमध्यीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र, यानी टीईआरएलएसतिरुवनंतपुरम के पास थुम्बा से नासा द्वारा उपलब्ध कराया गया नाइक-अपाचे साउंडिंग रॉकेट छोड़ा गया; यह स्थान चुंबकीय भूमध्य रेखा के निकट होने के कारण ऊपरी वायुमंडल के प्रयोगों के लिए उपयुक्त था।
15 अगस्त 1969भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, यानी इसरोइसरो का औपचारिक गठन हुआ और इसने इनकोस्पार का स्थान लिया।
जून 1972अंतरिक्ष आयोगभारत सरकार ने अंतरिक्ष आयोग का गठन किया।
जून 1972अंतरिक्ष विभागभारत सरकार ने अंतरिक्ष विभाग बनाया।
सितंबर 1972इसरो अंतरिक्ष विभाग के अधीनइसरो को अंतरिक्ष विभाग के अधीन रखा गया।
  • 21 नवंबर 1963 की घटना को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की व्यवहारिक शुरुआत माना जाता है।
  • 15 अगस्त 1969 के गठन से विक्रम साराभाई को उपग्रह, प्रक्षेपण और अनुप्रयोग कार्यों के लिए समर्पित राष्ट्रीय संस्था मिली।
  • 1972 का ढांचा इस कार्यक्रम को स्थायी नीति-श्रृंखला, प्रशासनिक आधार और मंत्रिमंडलीय स्तर की प्राथमिकता देता है।
  • अंतरिक्ष विभाग का सचिवालय और इसरो मुख्यालय बेंगलुरु के अंतरिक्ष भवन में स्थित हैं।

संगठनात्मक संरचना

केंद्रस्थानभूमिका
वीएसएससीतिरुवनंतपुरमप्रक्षेपण यान कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र है और थुम्बा की प्रारंभिक रॉकेट परंपरा को आगे बढ़ाता है।
यूआरएससीबेंगलुरुउपग्रहों तथा उनसे जुड़ी तकनीकों के निर्माण का प्रमुख केंद्र है।
एलपीएससीतिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु तथा महेंद्रगिरिद्रव प्रणोदन प्रणालियों के विकास का दायित्व संभालता है।
एसडीएससी-शारश्रीहरिकोटाभारत का अंतरिक्ष बंदरगाह है, जहां प्रक्षेपण अवसंरचना, रेंज संचालन और प्रक्षेपण तैयारी एक साथ मिलती है।
  • इसरो की संगठनात्मक बनावट एक ही परिसर पर निर्भर नहीं है, बल्कि देशभर में फैले केंद्रों पर आधारित है।
  • इस केंद्र का नाम सतीश धवन के सम्मान में बाद की अवधि में रखा गया, 1981 में नहीं।

नेतृत्व की निरंतरता

नेतृत्वतथ्य
विक्रम साराभाईइनकोस्पार और इसरो की प्रारंभिक संस्थागत पृष्ठभूमि से जुड़े।
एम जी के मेनन1972 में थोड़े समय के लिए दायित्व संभाला।
सतीश धवनसंगठन को स्थिर आधार दिया और लंबी वृद्धि अवधि का नेतृत्व किया।
यू आर रावउपग्रह कार्यक्रम को मजबूत किया।
के कस्तूरीरंगन, जी माधवन नायर, के राधाकृष्णन, ए एस किरण कुमार, के सिवन और एस सोमनाथप्रक्षेपण यान, सुदूर संवेदन, नेविगेशन, चंद्र और ग्रह अभियानों तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी को आगे बढ़ाया।
डॉ. वी. नारायणनवर्तमान अध्यक्ष हैं; उन्होंने 13 जनवरी 2025 को अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और इसरो अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया।

वाणिज्यिक और नियामक ढांचा

संस्था/नीतिवर्ष/तिथिभूमिका
अंत्रिक्स1992पुरानी वाणिज्यिक शाखा थी।
एनएसआईएल6 मार्च 2019निगमित रूप में गठन हुआ; यह अंतरिक्ष विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है और उद्योग-सम्बद्ध वाणिज्यिक कार्यों की नई धुरी बनी।
इन-स्पेसजून 2020निजी भागीदारी को बढ़ावा देने, अनुमति देने और निगरानी करने के लिए एकल-खिड़की नोडल एजेंसी के रूप में बनाया गया।
भारतीय अंतरिक्ष नीति 20232023इसरो, एनएसआईएल और इन-स्पेस की भूमिकाओं को अधिक स्पष्ट ढंग से विभाजित किया।

राजस्थान संबंध

  • राजस्थान इस कहानी में प्रक्षेपण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अवसंरचना के रूप में जुड़ता है।
  • पीआरएल की उदयपुर सौर वेधशाला फ़तेह सागर झील के एक द्वीप पर स्थित है और अंतरिक्ष विभाग से जुड़ी सौर-भौतिकी सुविधा है।
  • 1975 में स्थापित यह केंद्र भारत के सौर अनुसंधान नेटवर्क में राजस्थान की स्थायी उपस्थिति दर्ज कराता है।
  • इसे माउंट आबू स्थित पीआरएल अवरक्त वेधशाला के साथ नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि दोनों की वैज्ञानिक भूमिका अलग है।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQइन संस्थाओं को सबसे पहले गठन से सबसे हाल के गठन तक क्रमबद्ध कीजिए।1 अंक · 50 शब्द
  1. Aइनकोस्पार → इसरो → अंतरिक्ष विभाग → न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेडसही
  2. Bइसरो → इनकोस्पार → अंतरिक्ष विभाग → न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड
  3. Cइनकोस्पार → अंतरिक्ष विभाग → इसरो → न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड
  4. Dइनकोस्पार → इसरो → न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड → अंतरिक्ष विभाग

व्याख्या

विकल्प क सही है क्योंकि 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत प्रारंभिक अंतरिक्ष अनुसंधान समिति के रूप में इनकोस्पार बना था। 1969 में इसरो ने इनकोस्पार का स्थान लिया, और 1972 में अंतरिक्ष विभाग तथा अंतरिक्ष आयोग ने प्रशासनिक और नीतिगत ढांचा दिया। इसके बहुत बाद 6 मार्च 2019 को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का गठन अंतरिक्ष विभाग के अधीन नई वाणिज्यिक इकाई के रूप में हुआ। इसलिए सही क्रम समिति, संगठन, विभागीय ढांचा और फिर वाणिज्यिक सार्वजनिक उपक्रम का है।

~50 शब्द · 1 अंक