परमाणु ऊर्जा विभाग ने 29 अप्रैल 2026 को बताया कि 15 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी मुख्यालय में 13 से 24 अप्रैल 2026 तक आयोजित परमाणु सुरक्षा अभिसमय की दसवीं समीक्षा बैठक में देश का प्रतिनिधित्व किया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्यक्ष ए. के. बालासुब्रह्मण्यम ने किया और इसमें नियामक, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड तथा वियना में भारतीय दूतावास के विशेषज्ञ शामिल थे। इस बैठक में अभिसमय के 30 वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया गया और 86 देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए।

भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर देश संबंधी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें सुरक्षा प्रदर्शन, नियामकीय प्रक्रियाओं और भविष्य की योजनाओं पर जोर दिया गया। प्रस्तुति में परमाणु सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और परमाणु ऊर्जा क्षमता के बड़े विस्तार के साथ वैश्विक परमाणु सुरक्षा समुदाय से उसके सतत जुड़ाव को रेखांकित किया गया। भारतीय प्रतिनिधियों ने समकालीन सुरक्षा प्रश्नों पर भी चर्चा की, अन्य देशों की प्रस्तुतियों की समीक्षा में भाग लिया और साझा चुनौतियों पर अपने दृष्टिकोण रखे।

विज्ञप्ति में बताया गया कि भारत ने 31 मार्च 2005 को परमाणु सुरक्षा अभिसमय की पुष्टि की थी। यह विधिक रूप से बाध्यकारी ढांचा परमाणु प्रतिष्ठानों पर रेडियोलॉजिकल खतरों के विरुद्ध मजबूत सुरक्षा तैयार कर विश्व स्तर पर उच्च परमाणु सुरक्षा बनाए रखने, लोगों, समाज और पर्यावरण को आयनीकारी विकिरण से बचाने तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम या शमन का लक्ष्य रखता है। परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित करने वाले देशों के लिए अभिसमय में स्थल चयन, डिजाइन, निर्माण और संचालन से जुड़ी बाध्यताएं शामिल हैं। यह नियामकीय प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों की तुलना अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ प्रक्रियाओं से करने का अवसर भी देता है, जिससे सहकर्मी समीक्षा परमाणु शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।