भारत और चीन 'द ग्रेट तांग रिकॉर्ड्स ऑन द वेस्टर्न रीजन्स' के संयुक्त नामांकन को लेकर वार्ता के उन्नत चरण में हैं। यह कृति सातवीं शताब्दी में मध्यकालीन भारत में चीनी बौद्ध भिक्षु एवं विद्वान श्वैनज़ांग की यात्राओं का विवरण है। सूत्रों के अनुसार, चीन के नेतृत्व में तथा भारत द्वारा समर्थित यह प्रस्ताव इस समय विदेश मंत्रालय के विचाराधीन है। चीन ने इससे पूर्व कूटनीतिक माध्यमों से यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में अंकन हेतु संयुक्त नामांकन में रुचि व्यक्त की थी। श्वैनज़ांग, जिन्हें ह्वेन त्सांग के नाम से भी जाना जाता है, ने भारत में उन्नीस वर्ष यात्रा की। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया तथा उस काल की राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं का वर्णन किया; उनके वृत्तांत आरंभिक मध्यकालीन भारत के अध्ययन का स्रोत बने हुए हैं। यह घटनाक्रम ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह से उभरा, जिसकी दूसरी बैठक इस माह वाराणसी में भारत की अध्यक्षता में हुई। संयुक्त नामांकन का उद्देश्य कतार को छोड़ना है, क्योंकि प्रत्येक देश को दो वर्ष के चक्र में केवल दो प्रलेख प्रस्तुत करने की अनुमति है, जबकि संयुक्त नामांकन की कोई सीमा नहीं है। भारत ईरान के साथ पंचतंत्र तथा दक्षिण अफ्रीका के साथ सत्याग्रह दर्शन के लिए भी स्थान सुरक्षित करना चाहता है। अनुशंसाएँ अगस्त में भोपाल में ब्रिक्स सांस्कृतिक मंत्रिस्तरीय बैठक को भेजी जाएँगी।