भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 10 अप्रैल 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए दूसरा एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण, IADT-02, सफलतापूर्वक संपन्न किया। भारतीय वायु सेना का एक चिनूक हेलीकॉप्टर लगभग 5.7 टन वजनी प्रतिकृति क्रू मॉड्यूल को, जिसका द्रव्यमान वास्तविक गगनयान G1 क्रू मॉड्यूल के बराबर रखा गया था, श्रीहरिकोटा तट से लगभग तीन किलोमीटर की ऊंचाई तक ले गया और समुद्र में निर्धारित ड्रॉप जोन में छोड़ दिया। नीचे आते समय चार अलग-अलग प्रकार के कुल दस पैराशूट तय क्रम में खुले, जिससे मॉड्यूल की गति धीरे-धीरे घटकर सुरक्षित स्प्लैशडाउन गति तक पहुंची। भारतीय नौसेना ने पुनर्प्राप्ति संचालन संभाला और मॉड्यूल को सफलतापूर्वक खोज निकाला, जिससे अवरोहण और पुनर्प्राप्ति की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन पूरा हुआ। IADT-02, अगस्त 2025 में हुए पहले एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण IADT-01 के बाद किया गया और यह भारत की पहली मानव रहित प्रदर्शक उड़ान गगनयान G1 मिशन की तैयारी की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है; मानवयुक्त मिशन अब वर्ष 2027 के लिए निर्धारित है। इस परीक्षण में मिशन जैसी परिस्थितियों में पैराशूट-आधारित गति-घटाने वाली प्रणाली का सत्यापन किया गया तथा इसरो, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और DRDO के बीच संयुक्त समन्वय प्रदर्शित हुआ। गगनयान का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिवसीय मिशन पर भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है, जिससे भारत स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बनेगा।
इसरो ने श्रीहरिकोटा में गगनयान के लिए दूसरा एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा किया
इसरो ने 10 अप्रैल 2026 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में गगनयान के लिए दूसरा समेकित वायु-पतन परीक्षण (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें 5.7 टन वजनी अनुरूपित क्रू मॉड्यूल के लिए 10 पैराशूटों वाली पैराशूट-आधारित गति-नियंत्रण प्रणाली की जांच हुई और भारतीय नौसेना ने मॉड्यूल को बरामद किया — यह G1 मानव रहित मिशन और 2027 की मानव उड़ान से पहले एक अहम पड़ाव है।
मुख्य तथ्य
- इसरो ने 10 अप्रैल 2026 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में IADT-02 परीक्षण किया
- भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने 5.7 टन वजनी सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल को लगभग 3 किमी की ऊंचाई से छोड़ा
- चार प्रकार के कुल 10 पैराशूट एक सटीक क्रम में खुले, जिससे मॉड्यूल स्प्लैशडाउन की सुरक्षित गति तक पहुंचा
- भारतीय नौसेना ने मॉड्यूल को सफलतापूर्वक पुनः प्राप्त किया; इसरो, वायु सेना, नौसेना और DRDO का संयुक्त समन्वय रहा
- IADT-02 गगनयान G1 मानव रहित मिशन तथा 2027 की मानव उड़ान (~400 किमी कक्षा) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: इसरो के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में दूसरे समेकित एयर-ड्रॉप परीक्षण के महत्व तथा भारत की स्वतंत्र मानवयुक्त अंतरिक्ष क्षमता प्राप्ति में विभिन्न एजेंसियों के समन्वय की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
10 अप्रैल 2026 को इसरो ने श्रीहरिकोटा में दूसरा समेकित एयर-ड्रॉप परीक्षण सफलतापूर्वक किया। इसमें दस पैराशूटों की मदद से 5.7 टन के अनुरूपित क्रू मॉड्यूल को धीमा कर सुरक्षित उतारने की प्रणाली का परीक्षण हुआ। भारतीय वायुसेना, नौसेना तथा रक्षा अनुसंधान संगठन का संयुक्त सहयोग 2027 की मानव उड़ान से पहले महत्वपूर्ण कदम है।
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इसरो ने 10 अप्रैल 2026 को गगनयान मिशन के दूसरे समेकित एयर-ड्रॉप परीक्षण आईएडीटी-02 का आयोजन किस केंद्र पर किया?
IADT-02 परीक्षण 10 अप्रैल 2026 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा में किया गया। भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने 5.7 टन वजनी नकली क्रू मॉड्यूल को श्रीहरिकोटा तट के निकट समुद्र में छोड़ा; चार प्रकार के 10 पैराशूट क्रमिक रूप से खुले और भारतीय नौसेना ने मॉड्यूल को वापस निकाला। अन्य केंद्र प्रक्षेपण यान विकास, उपग्रह असेंबली या प्रणोदन प्रणाली परीक्षण जैसे भिन्न काम करते हैं।
स्रोत: ISRO
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IADT-02 क्या है और यह कब किया गया?
IADT-02 यानी दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट इसरो ने 10 अप्रैल 2026 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में किया। इसका मकसद गगनयान क्रू मॉड्यूल के पैराशूट से उतरने और उसकी पुनर्प्राप्ति वाली प्रणाली की जांच करना था।
परीक्षण किस प्रकार किया गया?
भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने 5.7 टन वजनी क्रू मॉड्यूल के प्रतिरूप को लगभग 3 किमी की ऊंचाई तक ले जाकर समुद्र में छोड़ा; चार प्रकार के 10 पैराशूट खुले और मॉड्यूल की गति धीमी की, फिर भारतीय नौसेना ने उसे पुनः प्राप्त किया।
IADT-02 में किन एजेंसियों ने समन्वय किया?
इसरो ने परीक्षण का नेतृत्व किया, भारतीय वायु सेना ने मॉड्यूल छोड़ने के लिए विमान उपलब्ध कराया, भारतीय नौसेना ने पुनर्प्राप्ति संभाली और DRDO ने पूरी प्रणाली के समन्वय में योगदान दिया।
गगनयान कार्यक्रम के क्रम में IADT-02 कहां आता है?
यह अगस्त 2025 में हुए IADT-01 के बाद का चरण है और मानव रहित G1 प्रदर्शक उड़ान से पहले की एक ज़रूरी सीढ़ी है; मानवयुक्त गगनयान मिशन अब 2027 के लिए निर्धारित है और इसका लक्ष्य लगभग 400 किमी की कक्षा तक पहुंचना है।
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