प्रकाशित: 10 दिसंबर 2025समाचार स्रोतपर्यावरण
सिंधु घाटी सभ्यता का पतन बार-बार आने वाले भीषण सूखे से जुड़ा: नया पुरा-जलवायु शोध
नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण पुरा-जलवायु अध्ययन ने सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) के पतन को समझने का नजरिया नए सिरे से रखा है। शोध में IVC के क्रमिक पतन का मुख्य कारण किसी एक विनाशकारी सूखे को नहीं, बल्कि "सदियों से बार-बार आने वाले महा-सूखे" की एक श्रृंखला को माना गया है।
मुख्य निष्कर्ष: अध्ययन में लगभग 2425 ईसा पूर्व और 1400 ईसा पूर्व के बीच चार बड़े सूखों का उल्लेख है — यानी एक सहस्राब्दी से भी अधिक अवधि में। ये महा-सूखे उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि, जो लंबे अल नीनो जैसे पैटर्न से मिलती-जुलती थी, के कारण पड़े। इससे वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित हुआ और भारतीय ग्रीष्म मानसून (ISM) कमजोर पड़ा।
IVC, जो लगभग 2600-1900 ईसा पूर्व फली-फूली, में वर्तमान पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान में 1,500 से अधिक ज्ञात स्थल शामिल थे। प्रमुख शहरों में मोहनजो-दारो, हड़प्पा, धोलावीरा (गुजरात) और राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण — कालीबंगा शामिल हैं।
कालीबंगा (राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में) भारत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक IVC स्थलों में से एक है। यहाँ दुनिया के सबसे पुराने जुताई वाले खेत, अग्नि वेदियों और विकसित नगर नियोजन के साक्ष्य मिले हैं। नया शोध बताता है कि कालीबंगा और राजस्थान की इसी तरह की IVC बस्तियाँ, सभ्यता के पूर्वी/रेगिस्तानी किनारे पर होने के कारण, कमजोर मानसून का असर सबसे पहले झेलती होंगी।
जलवायु विज्ञान के लिए इस शोध का महत्व बड़ा है: यह दिखाता है कि पूर्व-औद्योगिक काल में भी प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव मानसून को बाधित कर सभ्यता-स्तर के पतन का कारण बन सकता था।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नया नेचर अध्ययन IVC के पतन के बारे में क्या बताता है?
अध्ययन IVC के पतन के प्राथमिक कारण के रूप में एकल विनाशकारी घटना नहीं बल्कि सदियों से बार-बार आने वाले महा-सूखे को पहचानता है। लगभग 2425 और 1400 ईसा पूर्व के बीच चार महा-सूखे आए।
शोध के अनुसार इन महा-सूखे का क्या कारण था?
उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ना (विस्तारित अल नीनो जैसे पैटर्न के समान) वायुमंडलीय परिसंचरण को बाधित किया और भारतीय ग्रीष्म मानसून को कमजोर किया।
इस शोध के संदर्भ में कालीबंगा (राजस्थान) क्यों महत्वपूर्ण है?
हनुमानगढ़ जिले, राजस्थान में कालीबंगा सबसे महत्वपूर्ण IVC स्थलों में से एक है। यहाँ दुनिया के सबसे पुराने जुताई वाले खेत और अग्नि वेदियों के साक्ष्य हैं। IVC के पूर्वी/रेगिस्तानी किनारे पर इसकी स्थिति का अर्थ है कि यह कमजोर मानसून से प्रभावित होने वाली पहली बस्तियों में होती।
सिंधु घाटी सभ्यता की अनुमानित तिथियाँ क्या थीं?
IVC लगभग 2600-1900 ईसा पूर्व (परिपक्व चरण) फला-फूला और वर्तमान पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान में 1,500 से अधिक ज्ञात स्थल थे। प्रमुख शहरों में मोहनजो-दारो, हड़प्पा, धोलावीरा और कालीबंगा शामिल हैं।
इस शोध की आधुनिक जलवायु प्रासंगिकता क्या है?
अध्ययन दर्शाता है कि प्रशांत का पूर्व-औद्योगिक प्राकृतिक तापमान भी सभ्यता-स्तरीय मानसून विघटन और सामाजिक पतन का कारण बन सकता है — दक्षिण एशियाई सभ्यताओं के लिए आधुनिक मानवजनित जलवायु परिवर्तन के संभावित परिणामों की चेतावनी।