16वें वित्त आयोग (अध्यक्ष: डॉ. अरविंद पनगढ़िया) ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट के साथ यह रिपोर्ट पेश की। सरकार ने आयोग की प्रमुख सिफारिश स्वीकार कर ली — केंद्रीय विभाज्य पूल में राज्यों की ऊर्ध्वाधर हिस्सेदारी 41% पर बरकरार रखना (15वें वित्त आयोग के समान)।

प्रमुख सिफारिशें: (1) क्षैतिज वितरण का नया मानदंड — 'GDP में योगदान' — 10% भार के साथ, जिससे अधिक आर्थिक उत्पादन वाले राज्यों को प्रोत्साहन मिलेगा; (2) केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त ऋण 2026-27 में GDP के 77.3% से घटकर 2030-31 में 73.1% होने का अनुमान; (3) राजकोषीय अनुशासन लागू करने के लिए राज्यों को राजकोषीय घाटे को सीमित करने और बजट से बाहर की उधारी बंद करने का निर्देश; (4) वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को ₹1.4 लाख करोड़ के वित्त आयोग अनुदान। राजस्थान के लिए नया GDP योगदान मानदंड आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है।