मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्यपालन विभाग ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साथ भारत में मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों की बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए एक तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (TCP) समझौते पर हस्ताक्षर किए। तीन पायलट बंदरगाहों — वनकबरा (दीव), करैकल (पुदुचेरी) एवं जखाऊ (गुजरात) — को ₹369.8 करोड़ के कुल निवेश से मंजूरी दी गई है। इस पहल में IoT सेंसर, AI, 5G, स्वचालन, उपग्रह संचार एवं तत्काल डेटा विश्लेषण को शामिल किया गया है।
भारत और FAO ने टिकाऊ मत्स्यपालन के लिए विश्वस्तरीय ब्लू पोर्ट बनाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए
मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्यपालन विभाग ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साथ भारत में मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों की बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए एक तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (TCP) समझौते पर हस्ताक्षर किए। तीन पायलट बंदरगाहों — वनकबरा (दीव), करैकल (पुदुचेरी) एवं जखाऊ (गुजरात) — को ₹369.8 करोड़ के कुल निवेश से अनुमोदित किया गया है। इस पहल में IoT सेंसर, AI, 5G, स्वचालन, उपग्रह संचार एवं तत्काल डेटा विश्लेषण को शामिल किया गया है।
मुख्य तथ्य
- भारत ने मछली बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए FAO के साथ तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (TCP) पर हस्ताक्षर किए।
- तीन पायलट बंदरगाह चुने गए: वनकबरा (दीव), करैकल (पुदुचेरी) और जखाऊ (गुजरात)।
- इस कार्यक्रम का लक्ष्य टिकाऊ मत्स्यपालन के लिए विश्वस्तरीय 'ब्लू पोर्ट' बनाना है।
- भारत का मत्स्य क्षेत्र राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन में 1.12% योगदान देता है और लगभग 3 करोड़ आजीविकाओं को सहारा देता है।
- FAO बुनियादी ढाँचा उन्नयन और खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
- यह पहल प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के अनुरूप है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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ब्लू पोर्ट्स के लिए भारत-एफएओ तकनीकी सहयोग कार्यक्रम के तहत कितने पायलट बंदरगाहों को मंजूरी दी गई है?
तीन पायलट बंदरगाहों — वणकबारा (दीव), कराईकल (पुदुचेरी), और जखौ (गुजरात) — को भारत-FAO TCP समझौते के तहत कुल 369.8 करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी दी गई है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत ने FAO के साथ जिस तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (TCP) पर हस्ताक्षर किए, वह क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
TCP भारत के मत्स्यपालन विभाग और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के बीच भारत में मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों की बुनियादी सुविधाओं के आधुनिकीकरण से जुड़ा समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य IoT सेंसर, AI, 5G, स्वचालन और उपग्रह संचार को जोड़कर विश्वस्तरीय 'ब्लू पोर्ट' बनाना है।
ब्लू पोर्ट पहल के तहत कौन से तीन पायलट बंदरगाह चुने गए हैं और कुल कितना निवेश आवंटित किया गया है?
तीन पायलट बंदरगाह हैं — वनकबरा (दीव), करैकल (पुदुचेरी) और जखाऊ (गुजरात)। इन बंदरगाहों को विश्वस्तरीय ब्लू पोर्ट में विकसित करने के लिए कुल ₹369.8 करोड़ का निवेश मंजूर किया गया है।
ब्लू पोर्ट पहल प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के उद्देश्यों से कैसे जुड़ी है?
PMMSY मत्स्य उत्पादन, निर्यात आय और मछुआरों की आय बढ़ाने की भारत की प्रमुख योजना है। ब्लू पोर्ट पहल बंदरगाहों के बुनियादी ढाँचे के उन्नयन, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स सुधार और खाद्य सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के जरिए PMMSY के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में सीधे मदद करती है।
GDP योगदान और रोजगार के मामले में भारत के मत्स्य क्षेत्र का आर्थिक महत्व क्या है?
भारत का मत्स्य क्षेत्र राष्ट्रीय GDP में लगभग 1.2% योगदान देता है और लगभग 2.8 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है, जो इसे — विशेषकर तटीय और द्वीपीय समुदायों के लिए — एक महत्वपूर्ण आजीविका क्षेत्र बनाता है।
प्रारंभिक समझौते के बाद FAO की क्या भूमिका होगी और इस पहल के लिए अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सहयोग क्यों जरूरी है?
FAO बुनियादी ढाँचे के उन्नयन, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन और बंदरगाह प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण में तकनीकी विशेषज्ञता देगा। अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सहयोग इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे वैश्विक मानक अपनाने में मदद मिलती है, ताकि भारत के बंदरगाह अंतर्राष्ट्रीय मछली निर्यात गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
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