इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय एवं अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन सर्वसम्मति से अपनाए गए 'इंदौर डिक्लेरेशन' के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी की उपस्थिति में प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन निर्णयों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित इन बैठकों में सदस्य एवं सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मंत्री ने बताया कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इनके पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी इनका लगभग 42 प्रतिशत योगदान है। किसान-केंद्रित इस घोषणापत्र में खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, जलवायु अनुकूल खेती और सतत कृषि विकास की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है।

इस अवसर पर चार नई संस्थागत पहलों पर सहमति बनी- एग्रो-इकोलॉजी एवं रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर पर ब्रिक्स सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क (भारत में नोडल संस्था भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम); डिजिटल एग्रीकल्चर पर ब्रिक्स नेटवर्क (समन्वय IIT दिल्ली द्वारा); बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर ग्लोबल फोरम; और ब्रिक्स AgriN (कृषि आदान, अनुवांशिक संसाधन एवं सूचना नेटवर्क)। पहले से स्थापित ब्रिक्स कृषि अनुसंधान प्लेटफॉर्म को 'Knowledge to Action Hub' के रूप में सुदृढ़ किया जाएगा तथा ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज जैसी पहल पर भी विचार-विमर्श को गति मिली। छोटे एवं सीमांत किसानों, महिलाओं और युवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।