केंद्रीय बजट 2026-27 में बायोफार्मा शक्ति योजना की घोषणा 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ की गई। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। योजना के तहत 3 नए एनआईपीईआर स्थापित करने और 7 मौजूदा एनआईपीईआर को अपग्रेड करने की बात शामिल है। एनआईपीईआर फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े प्रमुख संस्थान हैं, इसलिए यह पहल केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शोध और संस्थागत आधार को भी मजबूत करती है, जो एक गहरे बायोफार्मा इकोसिस्टम के लिए जरूरी है।
अर्थव्यवस्था और विज्ञान-प्रौद्योगिकी दोनों के दृष्टिकोण से यह योजना महत्वपूर्ण है। इसका दायरा राष्ट्रीय है, इसलिए इसे किसी एक राज्य तक सीमित सरकारी पहल की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र 200 से अधिक देशों को निर्यात करता है, इसलिए बायोफार्मा विनिर्माण में मजबूती निर्यात, औद्योगिक विकास और महत्वपूर्ण दवा सामग्री की आपूर्ति क्षमता से जुड़ती है। योजना का लक्ष्य महत्वपूर्ण दवा सामग्री के लिए आयात निर्भरता कम करना, घरेलू फार्मास्युटिकल उत्पादन क्षमता बढ़ाना और मजबूत बायोफार्मा इकोसिस्टम बनाना है। 2030 तक घरेलू सक्रिय औषधि घटक उत्पादन में 40% वृद्धि का लक्ष्य इस योजना को आपूर्ति श्रृंखला और आयात निर्भरता घटाने से जोड़ता है।
परीक्षा की दृष्टि से इसे सरकारी विज्ञान-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों, औद्योगिक विकास, आर्थिक सुधार और फार्मास्युटिकल उद्योग से जोड़कर पढ़ना चाहिए। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे प्रीलिम्स में योजना, परिव्यय, अवधि, एनआईपीईआर और लक्ष्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह विषय भारत की विनिर्माण क्षमता, आयात निर्भरता घटाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा और विज्ञान-प्रौद्योगिकी संस्थानों की भूमिका पर छोटे उत्तर या विश्लेषणात्मक प्रश्न के रूप में उपयोगी है।
