प्रकाशित: 5 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
भारत ने चांदीपुर से परमाणु क्षमता वाली अग्नि-3 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया
6 फरवरी 2026 को भारत ने ओडिशा तट पर चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से अग्नि-3 मध्यवर्ती दूरी बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) का सफल परीक्षण किया। प्रक्षेपण रणनीतिक बल कमान (SFC) के कार्मिकों ने एक मोबाइल लॉन्चर से नियमित परिचालन प्रशिक्षण अभ्यास के तहत किया।
अग्नि-3 DRDO द्वारा विकसित एक सतह-से-सतह बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,000–3,500 किमी है और यह 1,500 किग्रा तक का पेलोड ले जा सकती है। मिसाइल परमाणु-सक्षम है और दो चरणीय ठोस ईंधन विन्यास पर आधारित है, जिससे तेज प्रक्षेपण तत्परता, सुरक्षित भंडारण और सरल रखरखाव सुनिश्चित होता है। मिसाइल अपने निर्धारित उड़ान पथ पर चली और बंगाल की खाड़ी में लक्षित क्षेत्र को सटीक रूप से भेदा। DRDO ने सभी मिशन उद्देश्यों की पूर्ति की पुष्टि की।
यह परीक्षण रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि अग्नि-3 की मारक क्षमता पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र और चीन के बड़े हिस्से तक पहुंचती है, जो भारत की 'पहले परमाणु हमला नहीं' की नीति के तहत विश्वसनीय न्यूनतम निरोध को मजबूत करती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध नीति के लिए अग्नि-3 मिसाइल परीक्षण के सामरिक महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
6 फरवरी 2026 को भारत ने चांदीपुर, ओडिशा से परमाणु-सक्षम अग्नि-3 का परीक्षण किया। DRDO द्वारा विकसित इस मिसाइल की मारक क्षमता 3,000-3,500 किलोमीटर है और यह दो-चरणीय ठोस-ईंधन विन्यास में 1,500 किलोग्राम भार वहन करती है। सामरिक बल कमान ने इसे मोबाइल लांचर से प्रक्षेपित किया; यह सभी मापदंडों पर खरी उतरी और पहले प्रयोग न करने के सिद्धांत के तहत विश्वसनीय प्रतिरोध को सुदृढ़ किया।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
अग्नि-3 मिसाइल की अनुमानित सीमा कितनी है?
व्याख्या · सही उत्तर Cअग्नि-3 डीआरडीओ द्वारा विकसित लगभग 3500-5000 किमी की रेंज वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अग्नि-3 मिसाइल क्या है और यह किस प्रकार की मिसाइल है?
अग्नि-3 भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक परमाणु-सक्षम मध्यवर्ती दूरी बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। यह दो-चरणीय, ठोस-ईंधन मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 3,000–3,500 किमी है और यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
2026 में अग्नि-3 मिसाइल का परीक्षण कहाँ और कब किया गया?
अग्नि-3 का 6 फरवरी 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। प्रक्षेपण रणनीतिक बल कमान (SFC) द्वारा किया गया और सभी मिशन उद्देश्य पूरे हुए।
रणनीतिक बल कमान क्या है और इसकी क्या भूमिका है?
रणनीतिक बल कमान (SFC) भारत के परमाणु कमान प्राधिकरण के तहत एक त्रि-सेवा कमान है, जो भारत के सामरिक परमाणु शस्त्रागार के प्रबंधन और प्रशासन के लिए जिम्मेदार है। यह भारत की परमाणु प्रतिरोध क्षमता का संचालन करती है।
भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध नीति क्या है और अग्नि-3 इसे कैसे मजबूत करती है?
भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध नीति के तहत भारत किसी भी परमाणु हमले को रोकने के लिए पर्याप्त परमाणु शक्ति बनाए रखता है और 'पहले प्रयोग नहीं' की नीति अपनाता है। अग्नि-3 अपनी 3,000–3,500 किमी की मारक क्षमता और ठोस ईंधन के कारण तेजी से प्रक्षेपित होने की क्षमता से इस प्रतिरोध नीति की विश्वसनीयता को मजबूत करती है।
अग्नि-3 भारत के परमाणु त्रय में क्या भूमिका निभाती है?
भारत के परमाणु त्रय में जमीन से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें (जैसे अग्नि श्रृंखला), पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें (INS अरिहंत से K-श्रृंखला) और हवा से प्रक्षेपित हथियार (मिराज-2000 और जगुआर विमान) शामिल हैं। अग्नि-3 इस त्रय का जमीनी स्तंभ है।