भारत ने दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को 2035 के लिए अपना संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) औपचारिक रूप से सौंपा। यह कदम ब्राजील के बेलेम में COP30 वार्ता की पृष्ठभूमि में उठाया गया।

संशोधित NDC में दो प्रमुख लक्ष्य हैं। पहला, भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती का संकल्प लिया है। यह पहले के 45% लक्ष्य से आगे का लक्ष्य है। भारत ने 2020 के दशक के मध्य तक 2005 से 2020 के दौरान उत्सर्जन तीव्रता में 36% कटौती हासिल कर ली है।

दूसरा, भारत ने 2035 तक अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का संकल्प लिया है। यह पहले के 50% लक्ष्य से आगे का लक्ष्य है। नवीकरणीय ऊर्जा के तेज विस्तार, खासकर सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने में भारत की बड़ी भूमिका, इस लक्ष्य तक पहुँचने का भरोसेमंद रास्ता देती है।

NDC का यह प्रस्तुतीकरण पेरिस समझौते के तहत वैश्विक आकलन प्रक्रिया के संदर्भ में आया है। COP30 में माना गया कि मौजूदा राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएँ 2100 तक लगभग 2.5-3°C तापमान वृद्धि की दिशा में ले जा रही हैं। भारत के NDC में पूर्ण उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य नहीं रखा गया है। भारत का तर्क है कि एक विकासशील देश से ऐतिहासिक रूप से औद्योगीकृत देशों जैसी प्रतिबद्धताओं की अपेक्षा नहीं की जा सकती।