प्रकाशित: 30 नवंबर 2025PIB / Down to Earthपर्यावरण
भारत का संशोधित NDC 2035: 47% उत्सर्जन तीव्रता कटौती, 60% गैर-जीवाश्म बिजली
भारत ने दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को 2035 के लिए अपना संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) औपचारिक रूप से सौंपा। यह कदम ब्राजील के बेलेम में COP30 वार्ता की पृष्ठभूमि में उठाया गया।
संशोधित NDC में दो प्रमुख लक्ष्य हैं। पहला, भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती का संकल्प लिया है। यह पहले के 45% लक्ष्य से आगे का लक्ष्य है। भारत ने 2020 के दशक के मध्य तक 2005 से 2020 के दौरान उत्सर्जन तीव्रता में 36% कटौती हासिल कर ली है।
दूसरा, भारत ने 2035 तक अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का संकल्प लिया है। यह पहले के 50% लक्ष्य से आगे का लक्ष्य है। नवीकरणीय ऊर्जा के तेज विस्तार, खासकर सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने में भारत की बड़ी भूमिका, इस लक्ष्य तक पहुँचने का भरोसेमंद रास्ता देती है।
NDC का यह प्रस्तुतीकरण पेरिस समझौते के तहत वैश्विक आकलन प्रक्रिया के संदर्भ में आया है। COP30 में माना गया कि मौजूदा राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएँ 2100 तक लगभग 2.5-3°C तापमान वृद्धि की दिशा में ले जा रही हैं। भारत के NDC में पूर्ण उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य नहीं रखा गया है। भारत का तर्क है कि एक विकासशील देश से ऐतिहासिक रूप से औद्योगीकृत देशों जैसी प्रतिबद्धताओं की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के 2035 के संशोधित NDC में दो प्रमुख लक्ष्य क्या हैं?
दो प्रमुख लक्ष्य हैं: (1) 2035 तक 2005 के स्तर की तुलना में GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती, और (2) 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता का 60% हिस्सा।
2025 के संशोधन से पहले उत्सर्जन तीव्रता कटौती का भारत का पिछला NDC लक्ष्य क्या था?
भारत का पिछला लक्ष्य 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता में 45% कटौती था। संशोधित 2035 NDC में इसे बढ़ाकर 47% किया गया है।
भारत का संशोधित NDC किस निकाय को सौंपा गया?
भारत का संशोधित NDC दिसंबर 2025 में UNFCCC (संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन) को सौंपा गया।
भारत के NDC में पूर्ण उत्सर्जन कटौती लक्ष्य क्यों शामिल नहीं है?
भारत का तर्क है कि जिस विकासशील देश में करोड़ों लोग अभी भी ऊर्जा की कमी से जूझ रहे हैं, वह ऐतिहासिक रूप से औद्योगीकृत विकसित देशों जैसी पूर्ण कटौती प्रतिबद्धताएं नहीं कर सकता।
वैश्विक स्टॉकटेक प्रक्रिया का क्या महत्व है?
पेरिस समझौते के तहत वैश्विक स्टॉकटेक में सामूहिक प्रगति की समीक्षा होती है। COP30 में पाया गया कि मौजूदा प्रतिज्ञाओं के आधार पर 2100 तक तापमान 2.5-3°C बढ़ सकता है, जो 1.5°C लक्ष्य से काफी अधिक है।