राजस्थान के उदयपुर में स्मार्ट यातायात प्रबंधन के लिए पायलट परियोजना के रूप में व्यस्त फतेहपुरा चौराहे पर AI-आधारित अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली शुरू की गई। यह प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और तात्कालिक सेंसरों से वाहनों की संख्या मापती है और उसी आधार पर सिग्नल का समय बदलती है, जिससे यातायात में प्रतीक्षा-अवधि और जाम कम होते हैं। यह राजस्थान के स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा है और राष्ट्रीय एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ITMS) ढाँचे के अनुरूप है।
उदयपुर ने फतेहपुरा चौराहे पर AI आधारित यातायात सिग्नल प्रणाली शुरू की
राजस्थान के उदयपुर में स्मार्ट यातायात प्रबंधन के लिए पायलट परियोजना के रूप में व्यस्त फतेहपुरा चौराहे पर AI-आधारित अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली शुरू की गई। यह प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और रियल-टाइम सेंसरों से वाहनों की संख्या मापती है और उसी के अनुसार सिग्नल का समय बदलती है, जिससे यातायात में प्रतीक्षा का समय और जाम कम होता है। यह राजस्थान के स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा है तथा राष्ट्रीय एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ITMS) ढाँचे के अनुरूप है।
मुख्य तथ्य
- उदयपुर ने पायलट परियोजना के रूप में फतेहपुरा में AI-आधारित, यातायात के अनुसार ढलने वाली सिग्नल प्रणाली शुरू की।
- यह प्रणाली कैमरों और रियल-टाइम सेंसरों से वाहन घनत्व की लगातार निगरानी करती है।
- प्रत्येक लेन से मिलने वाले रियल-टाइम भीड़ डेटा के आधार पर सिग्नल का समय अपने-आप समायोजित होता है।
- यह पायलट परियोजना बुद्धिमान शहरी अवसंरचना के लिए राजस्थान के स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा है।
- प्रणाली राष्ट्रीय एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ITMS) ढांचे के अनुरूप है।
- सफलतापूर्वक लागू होने के बाद इसे उदयपुर और राजस्थान के अन्य चौराहों तक बढ़ाया जाएगा।
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अक्टूबर 2025 में उदयपुर के किस चौराहे पर AI-संचालित अनुकूली ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली को पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया गया?
उदयपुर, राजस्थान ने व्यस्त फतेहपुरा चौराहे पर एक पायलट परियोजना के रूप में AI-संचालित अनुकूली ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली शुरू की। इसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और रियल-टाइम सेंसरों से वाहन घनत्व की निगरानी की जाती है और उसी के अनुसार सिग्नल का समय बदला जाता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उदयपुर की AI-आधारित यातायात सिग्नल प्रणाली कहाँ शुरू हुई और इसमें कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होती है?
उदयपुर में पायलट परियोजना के रूप में फतेहपुरा चौराहे पर AI-आधारित अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली शुरू की गई। यह प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और रियल-टाइम सेंसरों से प्रत्येक लेन में वाहन घनत्व मापती है और उसी के आधार पर सिग्नल का समय बदलती है।
उदयपुर की AI यातायात सिग्नल प्रणाली किस राष्ट्रीय ढाँचे के अनुरूप है?
उदयपुर की AI यातायात सिग्नल प्रणाली राष्ट्रीय एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ITMS) ढाँचे के अनुरूप है। यह राजस्थान के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत स्मार्ट शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास का भी हिस्सा है।
AI अनुकूली सिग्नल प्रणाली पारंपरिक यातायात सिग्नलों से कैसे अलग काम करती है?
निश्चित समय अंतराल वाले पारंपरिक सिग्नलों के विपरीत, AI अनुकूली प्रणाली कैमरों और सेंसरों से प्रत्येक लेन में रियल-टाइम वाहन घनत्व की निगरानी करती है। भीड़ के लाइव डेटा के आधार पर हरी बत्ती की अवधि बढ़ाई या घटाई जाती है।
उदयपुर की AI यातायात प्रणाली से कौन से पर्यावरणीय और शहरी लाभ अपेक्षित हैं?
वाहनों के इंतजार का समय और जाम कम होने से AI प्रणाली के कारण वाहन उत्सर्जन और ईंधन खपत घटने की उम्मीद है। इससे यात्रा समय भी कम होगा, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही सुधरेगी और उदयपुर के स्मार्ट सिटी लक्ष्य पूरे होंगे।
फतेहपुरा पर शुरू हुए AI यातायात सिग्नल पायलट के विस्तार की क्या योजना है?
यदि फतेहपुरा पायलट सफल रहा तो AI अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली को उदयपुर के अन्य प्रमुख चौराहों तक बढ़ाने की योजना है। इसे राजस्थान के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत राज्य के अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।
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