22 अप्रैल 2026 को केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम निर्यात आँकड़े जारी किए, जिनसे पता चलता है कि भारत के वस्त्र और हस्तशिल्प निर्यात 2.1 प्रतिशत बढ़कर 3,16,334.9 करोड़ रुपये हो गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 3,09,859.3 करोड़ रुपये थे। यह वृद्धि संयुक्त राज्य अमेरिका (जो अभी भी भारत का सबसे बड़ा एकल वस्त्र बाज़ार है) द्वारा लगाए गए उच्च प्रतिशोधी शुल्कों के बावजूद हासिल की गई, जो देश के विविध निर्यात आधार की मजबूती दिखाती है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान 120 से अधिक गंतव्यों को भेजे गए माल में वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विशेष रूप से मज़बूत वृद्धि पश्चिम एशिया (UAE 22.3 प्रतिशत), पूर्वी एशिया (जापान 20.6 प्रतिशत), यूरोप (UK 7.8 प्रतिशत, जर्मनी 9.9 प्रतिशत, स्पेन 15.5 प्रतिशत), तथा उभरते अफ़्रीकी बाज़ारों (मिस्र 38.3 प्रतिशत, नाइजीरिया 21.4 प्रतिशत, सेनेगल 54.4 प्रतिशत और सूडान 205.6 प्रतिशत) में हुई। मंत्रालय ने इस मजबूती का श्रेय व्यापार-नीति और प्रतिपूर्ति से जुड़े उपायों के संयोजन को दिया: 31 मार्च 2026 के बाद राज्य और केंद्रीय करों एवं उपकरों की छूट (RoSCTL) तथा निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की प्रतिपूर्ति (RoDTEP) योजनाओं का विस्तार, 1 अक्तूबर 2025 को भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते का लागू होना, जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित भारत-UK व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता, दिसंबर 2025 में हस्ताक्षरित भारत-ओमान CEPA, तथा 22 दिसंबर 2025 को भारत-न्यूज़ीलैंड FTA की घोषणा।