परमाणु ऊर्जा विभाग की 27 अप्रैल 2026 की विज्ञप्ति में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का यह बयान दर्ज है कि कलपक्कम का 500 मेगावाट विद्युत प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पूरी तरह चालू होने पर भारत रूस के बाद वाणिज्यिक स्तर का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश बनेगा। सांसदों और विधायकों के लिए लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त की। इस रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने विकसित किया और भाविनी ने बनाया। यह यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग करता है और इसे खपत से अधिक ईंधन पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया है, इसलिए यह भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा रणनीति के दूसरे चरण की शुरुआत से जुड़ता है। विज्ञप्ति में इस चरण को तीसरे चरण में भारत के बड़े थोरियम भंडारों के भविष्य के उपयोग से जोड़ा गया। डॉ. सिंह ने कहा कि रूस अभी वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला एकमात्र देश है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने ऐतिहासिक रूप से प्रायोगिक फास्ट रिएक्टर बनाए या चलाए, जिनमें से अनेक अब बंद हैं। उन्होंने फास्ट ब्रीडर तकनीक को भारत के स्वच्छ-ऊर्जा संक्रमण और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि डेटा अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण के लिए भरोसेमंद, सतत स्वच्छ बिजली महत्वपूर्ण होगी। हाल में शुरू परमाणु मिशन के तहत 20,000 करोड़ रुपये आवंटित हैं और 2033 तक पांच लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों की योजना है। ऐसे रिएक्टर कैप्टिव बिजली उत्पादन, उद्योग, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, ग्रिड संपर्क से वंचित दूरस्थ क्षेत्रों और पुनर्प्रयुक्त तापीय संयंत्रों में मदद कर सकते हैं। विज्ञप्ति में परमाणु ऊर्जा को 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य के लिए आवश्यक संतुलित ऊर्जा मिश्रण का हिस्सा बताया गया।