प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष की विषयवस्तु थी "विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास"। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शासी परिषद की बैठक में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद पर बल देते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा तथा विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बननी चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 70 करोड़ लोग 25 वर्ष से कम आयु के हैं और राज्यों से आग्रह किया कि वे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलें। उन्होंने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने, हाल के मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने तथा सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से 6 करोड़ करने, एक जिला एक उत्पाद को मजबूत करने और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। अल नीनो की चिंताओं के बीच उन्होंने जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया तथा बताया कि इस खरीफ सीजन में किसानों ने 11 लाख टन जैविक खाद खरीदी। उन्होंने एआई को एक अवसर मानने और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्रियों ने उन्हें कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी।