भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित 'स्टेट ऑफ द इकॉनमी' लेख, जिसे RBI के शोधकर्ताओं ने लिखा है, में चेतावनी दी गई है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रतिकूल रहा तो यह देश के विकास और महंगाई की संभावनाओं पर भारी पड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 29 मई 2026 को जारी नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष मानसून की वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। मानसून केरल में 4 जून को पहुँचा, जो सामान्य तिथि 1 जून से तीन दिन देर से था, और 1 से 21 जून के बीच देशव्यापी संचयी वर्षा सामान्य से काफी कम रही है। जलाशयों की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में नीचे खिसकी है, परंतु दशकीय औसत से ऊपर बनी हुई है। लेख में बताया गया कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास चावल और गेहूँ का सार्वजनिक भंडार बफर मानदंडों से कहीं अधिक है, जो किसी आपूर्ति बाधा या मूल्य वृद्धि के विरुद्ध रणनीतिक कवच का काम करेगा, विशेषकर संभावित एल नीनो की स्थिति में। मौद्रिक नीति समिति ने 5 जून की बैठक में विकास अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% किया और महंगाई पूर्वानुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया, जिसके पीछे ऊँचे तेल दाम, वैश्विक व्यापार अनिश्चितता, प्रतिकूल मौसम और भू-राजनीतिक तनाव कारण बताए गए। इसके बावजूद वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी, जिसे निजी उपभोग और स्थिर निवेश का सहारा मिला। मई के उच्च-आवृत्ति संकेतक मज़बूती दर्शाते हैं, जिनमें ई-वे बिल और बिजली माँग में दोहरे अंकों की वृद्धि शामिल है। लेख ने यह भी चेताया कि अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते के टूटने से महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जोखिम फिर भड़क सकते हैं।