भारतीय रिज़र्व बैंक, मौद्रिक प्रबंधन, बैंकिंग एवं वित्तीय सुधार
मुख्य तथ्य
- RBI का रेपो रेट (अप्रैल 2025) — वर्तमान दर: 6.00% — फरवरी 2025 और अप्रैल 2025 में 25-25 आधार अंक घटाया गया (2024 में 6.50% से)
- मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचा — अगस्त 2016 से वैधानिक मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के तहत — CPI लक्ष्य: 4% ± 2% (2%–6% सहिष्णुता बैंड)
- प्रमुख मौद्रिक नीति दरें (अप्रैल 2025) — रेपो दर: 6.00% — स्थायी जमा सुविधा (SDF): 5.75% — सीमांत स्थायी सुविधा (MSF): 6.25%
- मौद्रिक नीति समिति (MPC) — RBI अधिनियम संशोधन 2016 के तहत गठित — छह सदस्य बहुमत से रेपो दर तय करते हैं — RBI गवर्नर का निर्णायक मत
- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार — जनवरी 2025 में $688 अरब — 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त
मुख्य बिंदु
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RBI का रेपो रेट (अप्रैल 2025)
- वर्तमान दर: 6.00%
- फरवरी 2025 और अप्रैल 2025 में 25-25 आधार अंक घटाया गया (2024 में 6.50% से)
- CPI मुद्रास्फीति कम होने पर विकास समर्थन के लिए उदार रुख का संकेत
- 2
मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचा
- अगस्त 2016 से वैधानिक मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के तहत
- CPI लक्ष्य: 4% ± 2% (2%–6% सहिष्णुता बैंड)
- प्रत्येक 5 वर्ष में समीक्षा
- MPC: 3 RBI सदस्य + 3 सरकार द्वारा मनोनीत बाहरी सदस्य
- 3
प्रमुख मौद्रिक नीति दरें (अप्रैल 2025)
- रेपो दर: 6.00%
- स्थायी जमा सुविधा (SDF): 5.75%
- सीमांत स्थायी सुविधा (MSF): 6.25%
- बैंक दर: 6.25% | CRR: 4.0% | SLR: 18.0%
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मौद्रिक नीति समिति (MPC)
- RBI अधिनियम संशोधन 2016 के तहत गठित
- छह सदस्य बहुमत से रेपो दर तय करते हैं
- RBI गवर्नर का निर्णायक मत
- वर्ष में 6 बार (हर 2 महीने) बैठक; बाहरी सदस्यों का 4-वर्षीय कार्यकाल
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RBI के कार्य
- (a) मौद्रिक प्राधिकरण — मौद्रिक नीति
- (b) बैंकों और NBFC का नियामक/पर्यवेक्षक
- (c) सरकार का बैंकर और ऋण प्रबंधक
- (d) विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक
- (e) मुद्रा जारीकर्ता
- (f) विकासात्मक भूमिका — वित्तीय समावेश
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार
- जनवरी 2025 में $688 अरब — 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त
- संरचना: विदेशी मुद्रा संपत्ति ($600 अरब), सोना ($68 अरब), SDR ($18 अरब), IMF आरक्षित स्थिति
- 2021 में $642 अरब की चरम
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एनपीए संकट और समाधान
- सकल एनपीए अनुपात 11.5% (मार्च 2018) की चरम स्थिति पर था
- घटकर 2.67% (सितंबर 2024) रह गया — एक दशक से अधिक में सबसे कम
- सरफेसी अधिनियम, ऋण वसूली अधिकरण प्रणाली, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016 तथा बैंक पुनर्पूंजीकरण के बाद यह गिरावट आई
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दिवालियापन और दिवाला संहिता (IBC) 2016
- भारत का ऐतिहासिक वित्तीय सुधार
- समय-सीमित प्रक्रिया: 180 दिन (270 दिन तक विस्तार योग्य)
- 12 अतिव्यापी कानूनों की जगह
- NCLT अधिनिर्णय प्राधिकरण और NCLAT अपीलीय न्यायाधिकरण के रूप में स्थापित
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प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL)
- बैंकों को समायोजित शुद्ध बैंक क्रेडिट (ANBC) का 40% प्राथमिकता क्षेत्रों को देना अनिवार्य
- कृषि: 18% | सूक्ष्म उद्यम: 7.5% | कमजोर वर्ग: 12%
- निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा भी शामिल
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बैंकिंग क्षेत्र समेकन
- 2017 में 27 सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों से अब 12 PSBs — महा-विलय के बाद
- OBC + यूनाइटेड → PNB (2020)
- विजया + देना → बैंक ऑफ बड़ौदा (2019)
- आंध्र + कॉर्पोरेशन + यूनियन → यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (2020)
- सिंडिकेट बैंक → केनरा बैंक (2020)
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भुगतान प्रणाली नवाचार
- मार्च 2025 में UPI ने 17.4 अरब लेन-देन (23.25 लाख करोड़ रुपये) संसाधित किए
- NPCI चलाता है: UPI, IMPS, NACH, FASTag, RuPay
- RBI ने नवंबर 2022 में डिजिटल रुपया (e-Rs) पायलट — CBDC लॉन्च किया
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वित्तीय समावेश — जन धन योजना
- प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू
- 2025 तक 54 करोड़ से अधिक बुनियादी बचत खाते खोले गए
- कुल जमा: 2.31 लाख करोड़ रुपये
- सुविधाएँ: शून्य-शेष, RuPay डेबिट कार्ड, 2 लाख दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट सुविधा
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PYQ दोहराव
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भारतीय रिज़र्व बैंक भारत के मौद्रिक ढाँचे में क्या भूमिका निभाता है?
भारतीय रिज़र्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है, जो मौद्रिक नीति, मुद्रा-निर्गम, बैंकिंग नियमन, सरकार की बैंकिंग, सार्वजनिक ऋण-प्रबंधन और विदेशी मुद्रा प्रबंधन को एक ही संस्थागत ढाँचे में संभालता है।
स्थापना और पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 के तहत हिल्टन यंग कमीशन (भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग, 1926) की सिफारिशों के आधार पर हुई। भारतीय रिज़र्व बैंक के इतिहास-वृत्त के अनुसार बैंक ने 1 अप्रैल 1935 से काम शुरू किया और मुद्रा-निर्गम, भंडार-संरक्षण तथा ऋण-मुद्रा व्यवस्था को देश के हित में चलाने का दायित्व लिया। इसे 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकृत किया गया। इसका केंद्रीय कार्यालय पहले कोलकाता में था और 1937 में स्थायी रूप से मुंबई चला गया। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई से जुड़े 4 स्थानीय बोर्ड क्षेत्रीय परामर्श की भूमिका निभाते हैं; इन्हें केवल क्षेत्रीय कार्यालय समझना ठीक नहीं है।
भारतीय रिज़र्व बैंक भारत की शीर्ष मौद्रिक संस्था के रूप में कार्य करता है — जो केंद्रीय बैंक (मुद्रा आपूर्ति और मौद्रिक नीति), बैंकिंग नियामक, सरकार के बैंकर, विदेशी मुद्रा प्रबंधक और विकासात्मक संस्था के कार्यों का समन्वय करता है। यह बहु-कार्यात्मक डिज़ाइन भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के सामान्य केंद्रीय बैंकों से अधिक व्यापक बनाता है। परीक्षा में इसी व्यापकता को याद रखना ज़रूरी है: बैंक केवल रेपो दर तय नहीं करता, बल्कि बैंकिंग-व्यवस्था का भरोसा, सरकारी नकदी-प्रबंधन, भुगतान प्रणाली और बाह्य क्षेत्र की स्थिरता भी इससे जुड़ी रहती है।
कानूनी ढाँचा
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 — भारतीय रिज़र्व बैंक की संरचना और शक्तियों को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून
- बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 — बैंकों पर भारतीय रिज़र्व बैंक को पर्यवेक्षी शक्तियाँ प्रदान करता है
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 — भुगतान अवसंरचना को नियंत्रित करता है
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 — विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम की जगह; भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा प्रबंधन में प्रमुख प्राधिकरण है
राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2026 के लिए परीक्षा उपयोगिता
मौद्रिक नीति, विशेष रूप से मौद्रिक नीति समिति ढाँचा और मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण, 2016 और 2023 में पूछे गए। 2025 में कई दर कटौतियों और डिजिटल भुगतान परिवर्तन के साथ, विषय में नई परीक्षा-प्रासंगिकता है। अभ्यर्थियों को सटीक नीति दरें, अनकार्यकारी परिसंपत्ति समाधान गति और 2016 के बाद के प्रमुख सुधार जानने चाहिए। उत्तर लिखते समय स्थापना-वर्ष, राष्ट्रीयकरण, वैधानिक आधार और आज की नीति-भूमिका को अलग-अलग बिंदुओं में रखना चाहिए, क्योंकि यही छोटे प्रश्न और पाँच-अंकीय उत्तर दोनों में काम आता है।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
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15Mमौद्रिक नीति समिति (MPC) क्या है? इसकी संरचना और मुद्रास्फीति लक्ष्य बताइए।
मॉडल उत्तर
MPC RBI अधिनियम 1934 (संशोधित 2016) के तहत गठित; बहुमत से रेपो दर तय करती है। संरचना: 6 सदस्य — 3 RBI से (गवर्नर अध्यक्ष, उपगवर्नर, कार्यकारी निदेशक) + 3 सरकार-मनोनीत (4-वर्षीय कार्यकाल)। वर्ष में 6 बार बैठक। लक्ष्य: CPI मुद्रास्फीति 4% ± 2% (2–6% सहिष्णुता)। यदि CPI लगातार 3 तिमाही 6% से अधिक रहे, RBI सरकार को रिपोर्ट देता है।
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