भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही, यानी अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.3 प्रतिशत पर पहुँच गया। पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह घाटा 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर था। चालू खाते में किसी देश के शेष विश्व के साथ वस्तुओं, सेवाओं, प्राथमिक आय और प्रेषण जैसी द्वितीयक आय से जुड़े लेनदेन दर्ज होते हैं। चालू खाता घाटा तब होता है जब वस्तुओं, सेवाओं और हस्तांतरणों के आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक हो जाता है। घाटा बढ़ने का मुख्य कारण वस्तु व्यापार में बड़ा अंतर रहा। वस्तु खाते का घाटा एक वर्ष पहले के 79.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 93.6 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, क्योंकि आयात में तेज़ उछाल आया। संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार के दबाव के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद सीमित की और महंगे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया, जिससे आयात बिल बढ़ गया। सकारात्मक पक्ष यह रहा कि सेवा अधिशेष 51.2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 57.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें सॉफ्टवेयर और व्यावसायिक सेवाओं के मजबूत निर्यात की बड़ी भूमिका रही। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए सामान्यतः मध्यम चालू खाता घाटा प्रबंधनीय माना जाता है, क्योंकि यह मजबूत निवेश मांग का संकेत दे सकता है। हालाँकि, लगातार बड़ा घाटा रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल सकता है, इसलिए यह भारतीय रिज़र्व बैंक और नीति निर्माताओं के लिए निगरानी का एक महत्वपूर्ण संकेतक बन जाता है।
भारत का चालू खाता घाटा दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर या जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर पहुँचा, वस्तु व्यापार घाटा बढ़ना इसका कारण रहा जबकि सेवा अधिशेष में वृद्धि हुई
भारत का चालू खाता घाटा अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर यानी जीडीपी का 1.3 प्रतिशत हो गया। एक वर्ष पहले यह 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर था। इसकी मुख्य वजह वस्तु व्यापार का बड़ा घाटा रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का अधिशेष बढ़ा।
मुख्य तथ्य
- भारत का चालू खाता घाटा अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर या जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर पहुँच गया।
- यह पिछले वर्ष की संबंधित तिमाही के 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर के घाटे से अधिक रहा।
- वस्तु खाते का घाटा एक वर्ष पूर्व के 79.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 93.6 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
- भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद सीमित की और महंगे स्रोतों की ओर रुख किया, जिससे आयात बिल बढ़ा।
- सेवा अधिशेष 51.2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 57.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
- चालू खाता किसी देश के शेष विश्व के साथ वस्तुओं, सेवाओं और आय में लेनदेन को दर्ज करता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में भारत के चालू खाता घाटे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चालू खाता घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 1.3% हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही के घाटे से अधिक था। 2. घाटे में यह वृद्धि मुख्यतः वस्तु व्यापार अंतर बढ़ने के कारण हुई। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-सा अथवा कौन-से सही हैं?
भारत का चालू खाता घाटा अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर या जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की संबंधित तिमाही के 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, इसलिए कथन 1 सही है। यह वृद्धि मुख्यतः बड़े वस्तु व्यापार अंतर के कारण रही, क्योंकि वस्तु खाते का घाटा 79.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 93.6 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, इसलिए कथन 2 भी सही है। अतः दोनों कथन सही हैं।
स्रोत: Reuters / Investing.com
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चालू खाता घाटा क्या है?
चालू खाता घाटा तब होता है जब किसी देश के शेष विश्व के साथ लेनदेन में वस्तुओं, सेवाओं और हस्तांतरण के आयात का मूल्य उसके निर्यात के मूल्य से अधिक हो जाता है।
अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा कितना था?
भारत का चालू खाता घाटा अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर या जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर पहुँच गया, जो एक वर्ष पूर्व के 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
चालू खाता घाटा क्यों बढ़ा?
घाटा मुख्य रूप से वस्तु व्यापार के बड़े अंतर के कारण बढ़ा। आयात में उछाल से वस्तु खाते का घाटा 93.6 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इसकी एक वजह यह भी रही कि भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी कच्चे तेल की जगह महंगे विकल्प अपनाए।
सेवा खाते का प्रदर्शन कैसा रहा?
सेवा अधिशेष 51.2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 57.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया; इसमें सॉफ्टवेयर और व्यावसायिक सेवाओं के मजबूत निर्यात की मदद रही।
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