सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और डाउन टू अर्थ पत्रिका ने 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में अनिल अग्रवाल डायलॉग में 'स्टेट ऑफ इंडिया'स एनवायरनमेंट 2026' रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में वैश्विक वैज्ञानिकों द्वारा चिह्नित नौ में से सात ग्रहीय सीमाओं के उल्लंघन की चेतावनी दी गई है। वायु गुणवत्ता पर रिपोर्ट बताती है कि भारत के 85% भूभाग में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का अभाव है। 2025 को अत्यधिक मौसमी घटनाओं वाले वर्ष के रूप में दर्ज किया गया: भारत में साल के 99% दिनों में चरम मौसम घटनाएं हुईं, जिनसे 4,419 मौतें हुईं। इनमें लू, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन और शीत लहर शामिल थीं। रिपोर्ट इको-एंग्जाइटी यानी जलवायु परिवर्तन की आशंकाओं से युवाओं में होने वाले मनोवैज्ञानिक तनाव को सार्वजनिक स्वास्थ्य की बढ़ती चिंता के रूप में बताती है। साथ ही, यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते पर्यावरणीय प्रभाव, खासकर डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत और AI कूलिंग सिस्टम की जल खपत, को स्थिरता की नई चुनौती के रूप में रेखांकित करती है।
CSE और डाउन टू अर्थ ने 'स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026' रिपोर्ट जारी की
CSE/डाउन टू अर्थ की SoIE 2026 रिपोर्ट (25 फरवरी, अनिल अग्रवाल डायलॉग) में चेतावनी — 9 में से 7 ग्रहीय सीमाओं का उल्लंघन; भारत के 85% हिस्से में वायु निगरानी नहीं; 2025 में 99% दिन चरम मौसम (4,419 मौतें); युवाओं में इको-एंग्जाइटी; AI का पर्यावरणीय प्रभाव।
मुख्य तथ्य
- 9 में से 7 ग्रहीय सीमाएँ पार हो चुकी हैं — रिपोर्ट में उद्धृत वैश्विक वैज्ञानिक सहमति
- भारत के 85% भूभाग में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क नहीं है
- 2025 में भारत में 99% दिन चरम मौसम की घटनाएं हुईं — 4,419 मौतें (लू, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, शीत लहर)
- इको-एंग्जाइटी — युवाओं में जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाला मनोवैज्ञानिक तनाव — सार्वजनिक स्वास्थ्य की बढ़ती चिंता
- AI का पर्यावरणीय प्रभाव: बहुत अधिक ऊर्जा खपत करने वाले डेटा सेंटर और ज्यादा पानी मांगने वाले कूलिंग सिस्टम — सततता की नई चुनौती
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: ग्रहीय सीमाओं, वायु गुणवत्ता निगरानी और चरम मौसम घटनाओं के संबंध में स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों पर प्रकाश डालें।
उत्तर (50 शब्द):
25 फरवरी 2026 को अनिल अग्रवाल संवाद में जारी सीएसई रिपोर्ट बताती है कि नौ में से सात ग्रहीय सीमाओं का उल्लंघन हो चुका है। भारत के 85 प्रतिशत भूभाग में वायु गुणवत्ता निगरानी का अभाव है। 2025 में 99 प्रतिशत दिनों में चरम मौसम से 4,419 मौतें हुईं। रिपोर्ट युवाओं में पारिस्थितिक चिंता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पर्यावरणीय प्रभाव का भी उल्लेख करती है।
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स्रोत: CSE / Down to Earth
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SoIE 2026 के अनुसार नौ में से कितनी ग्रहीय सीमाएं उल्लंघित हुई हैं?
9 में से 7 ग्रहीय सीमाओं का उल्लंघन हो चुका है।
भारत के कितने प्रतिशत हिस्से में वायु गुणवत्ता निगरानी नहीं है?
भारत के 85% भूभाग में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का अभाव है।
2025 में भारत में चरम मौसम से कितनी मौतें हुईं?
2025 में 4,419 मौतें हुईं — साल के 99% दिनों में चरम मौसम की घटनाएं दर्ज हुईं।
इको-एंग्जाइटी क्या है?
इको-एंग्जाइटी जलवायु परिवर्तन की आशंकाओं से युवाओं में उत्पन्न मनोवैज्ञानिक तनाव है।
रिपोर्ट AI को लेकर कौन-सी पर्यावरणीय चिंता बताती है?
रिपोर्ट डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत और AI कूलिंग सिस्टम में पानी की खपत को स्थिरता की नई चुनौती बताती है।
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