संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने COP30 से पहले अपनी वार्षिक उत्सर्जन अंतर रिपोर्ट 2025 जारी की, जिसमें बताया गया कि वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कुल बढ़ोतरी भारत में सबसे अधिक रही। रिपोर्ट अवधि में भारत ने 16.5 करोड़ टन (MT) GHG जोड़े, जो किसी भी अन्य देश से अधिक है।

हालांकि, रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण संदर्भ देती है: भारत की उत्सर्जन में 3.6% वृद्धि दर उसके तीव्र आर्थिक विकास और करोड़ों लोगों तक ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने को दर्शाती है। खास बात यह है कि भारत का प्रति व्यक्ति GHG उत्सर्जन सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है, जो वैश्विक औसत से काफी नीचे और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों से बहुत कम है।

वैश्विक स्तर पर रिपोर्ट गंभीर चेतावनी देती है: दुनिया पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2.3 से 2.5°C ऊपर तापमान बढ़ने की दिशा में जा रही है, जो पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य से काफी अधिक है। मौजूदा राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं और नीतियां उत्सर्जन अंतर को पाटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

ब्राजील के बेलेम में नवंबर 2025 में होने वाले COP30 से पहले रिपोर्ट जारी होने से प्रमुख उत्सर्जकों और विकसित देशों पर NDC बढ़ाने और विकासशील देशों को अधिक जलवायु वित्त प्रदान करने का दबाव बढ़ता है। भारत ने 2070 तक नेट जीरो और 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता की प्रतिबद्धता जताई है।