प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 25 मार्च 2026 को 2031–2035 की अवधि के लिए भारत के संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दी। यह UNFCCC को दिया जाने वाला भारत का नया जलवायु संकल्प है, जो COP31 से पहले अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को दर्शाता है।

संशोधित NDC के प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं: 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कटौती; 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करना; और अतिरिक्त वन एवं वृक्ष आवरण से 2035 तक 3.5 से 4 अरब टन CO2 के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना। भारत ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के दीर्घकालिक लक्ष्य को भी दोहराया।

यह संशोधित NDC 2022 की संशोधित NDC प्रतिबद्धता — 45% उत्सर्जन तीव्रता में कमी और 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म क्षमता — से आगे के लक्ष्य रखता है। नए लक्ष्य PM सूर्य घर, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और COP26 में घोषित पंचामृत एजेंडे के तहत हुई प्रगति को दर्शाते हैं।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है, लेकिन उसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन सबसे कम श्रेणी में है। कैबिनेट ने बताया कि भारत पहले ही 220 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित कर चुका है — यानी 2030 का गैर-जीवाश्म लक्ष्य नौ साल पहले ही हासिल हो गया।