26 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा दिवस मनाया गया; इसका पहला आयोजन 26 जनवरी 2024 को हुआ था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे प्रस्ताव 77/327 के ज़रिए घोषित किया था। इस दिवस का मुख्य संदेश न्यायसंगत और समावेशी ऊर्जा परिवर्तन पर जागरूकता बढ़ाना है, ताकि स्वच्छ ऊर्जा अपनाना केवल तकनीकी लक्ष्य न रहे, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़े। भारत ने इस अवसर पर बताया कि उसकी स्थापित बिजली क्षमता में 51% हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आ चुका है।
परीक्षा में इससे स्वच्छ ऊर्जा की अवधारणा, ऊर्जा पहुंच, जलवायु नीति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका को साथ जोड़कर पूछा जा सकता है। स्वच्छ ऊर्जा दिवस को पेरिस समझौते और सतत विकास लक्ष्य 7 से भी जोड़ा जाता है, जिसमें सस्ती, भरोसेमंद, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुंच पर ज़ोर है। इसी कारण RAS और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में तारीख, प्रस्ताव संख्या, संयुक्त राष्ट्र महासभा की भूमिका और भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। व्यापक तैयारी में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु नीति, समावेशी विकास और भारत की 2030 तक की ऊर्जा प्रतिबद्धताओं को साथ पढ़ना उपयोगी रहेगा।
स्टैटिक जीके के लिए इसे भारत के संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान से जोड़कर पढ़ना उपयोगी है। उस योगदान में 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45% कम करने, 2030 तक 50% संचयी बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने, वन आवरण से 2.5-3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने और 2070 तक नेट जीरो हासिल करने की बात शामिल है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी, प्रधानमंत्री सूर्य घर, प्रधानमंत्री कुसुम, राष्ट्रीय सौर मिशन और हरित हाइड्रोजन मिशन जैसे संदर्भों से यह विषय और व्यापक बनता है।
