केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रखा और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया। यह सार्वजनिक पूंजीगत व्यय अब तक का सबसे बड़ा बताया गया है। पूंजीगत व्यय पर यह जोर परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सरकार की वृद्धि रणनीति, बुनियादी ढांचे पर खर्च और राजकोषीय नीति की प्राथमिकताओं को एक साथ दिखाता है।

रेल मंत्रालय को पूंजीगत व्यय के लिए 2,77,830 करोड़ रुपये मिले। इसलिए बजट का रेलवे पक्ष भी प्रीलिम्स में सीधे तथ्य के रूप में और मुख्य परीक्षा में बुनियादी ढांचा, सार्वजनिक निवेश और विकास मॉडल के संदर्भ में पूछा जा सकता है। राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% पर अनुमानित है, जिससे राजकोषीय समेकन की दिशा जारी रहने का संकेत मिलता है। बजट अनुमान 2026-27 में GDP के अनुपात में ऋण 55.6% अनुमानित है, जबकि संशोधित अनुमान 2025-26 में यह 56.1% था। यह 0.5 प्रतिशत अंक की कमी है, इसलिए समेकन के रुझान को समझने के लिए उपयोगी है।

बजट ने तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों, यानी कर्तव्यों, पर जोर दिया: घरेलू विनिर्माण, उच्च वृद्धि वाली सेवाएं और युवा शक्ति से प्रेरित दृष्टिकोण के ज़रिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना। मौद्रिक एवं राजकोषीय नीति पढ़ते समय कुल व्यय, पूंजीगत व्यय और घाटे के उदाहरण इसी बजट से लिए जा सकते हैं। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इस बजट से आंकड़ा-आधारित प्रीलिम्स प्रश्न, राजकोषीय समेकन पर मुख्य परीक्षा प्रश्न और पूंजीगत व्यय बनाम कुल व्यय पर विश्लेषणात्मक प्रश्न बन सकते हैं।