भारत सरकार ने 15 मई 2026 को अधिसूचना संख्या 22/2026 केंद्रीय उत्पाद शुल्क जारी की, जिससे 16 मई 2026 से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर संरचना में संशोधन हुआ। यह अधिसूचना केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 5A को वित्त अधिनियम, 2002 की धारा 147 के साथ पढ़ते हुए मिली शक्तियों के प्रयोग में जारी की गई। संशोधित दरों के तहत पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में 3 रुपए प्रति लीटर का नया अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया। पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत के बाद पेट्रोल पर लगाया गया यह पहला ऐसा शुल्क है। साथ ही, डीजल निर्यात पर SAED को 23 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपए प्रति लीटर और विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) निर्यात पर 33 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया। अप्रत्याशित कर तंत्र पहली बार जुलाई 2022 में लागू किया गया था, ताकि घरेलू रिफाइनरों और उत्पादकों को ऊंची वैश्विक कीमतों से हुए असामान्य लाभ को कर के दायरे में लाया जा सके और ऊंची अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के दौर में निर्यात को हतोत्साहित कर पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। यह संशोधन सरकार की अप्रत्याशित कर दरों की पखवाड़ा समीक्षा का हिस्सा है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल और उत्पाद कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखा जाता है। पश्चिम एशिया संकट और कमजोर रुपए से अस्थिर हुए वैश्विक ऊर्जा बाजारों के बीच इस पुनर्संतुलन का उद्देश्य घरेलू ईंधन उपलब्धता, तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति और राजस्व संबंधी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है।