भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने रिपोर्ट संख्या 35 जारी की, जो NLC इंडिया लिमिटेड (पूर्व में नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन) का व्यापक प्रदर्शन ऑडिट है। यह कोयला मंत्रालय के अंतर्गत एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (CPSU) है। रिपोर्ट में NLC इंडिया के थर्मल पावर स्टेशनों और खनन कार्यों में महत्वपूर्ण वित्तीय नुकसान, परिचालन अक्षमताओं और गंभीर सुरक्षा विफलताओं का उल्लेख किया गया है।

CAG ऑडिट में पाया गया कि थर्मल पावर स्टेशनों में डिजाइन खामियों के कारण सार्वजनिक खजाने को 2,354 करोड़ रुपये का संचयी नुकसान हुआ। ये नुकसान इंजीनियरिंग और योजना की कमियों से हुए।

भूमि प्रबंधन की एक बड़ी विफलता भी दर्ज की गई है: लगभग 580 हेक्टेयर भूमि, जो NLC इंडिया की है, उसके कब्जे से बाहर है। यह अतिक्रमित या विवादित भूमि है, जो सार्वजनिक संपत्ति की महत्वपूर्ण हानि दिखाती है।

सबसे चिंताजनक निष्कर्ष 2018-2020 के बीच NLC इंडिया की सुविधाओं में आग की घटनाओं से संबंधित है। इन आग की घटनाओं में 20 श्रमिकों की दुखद मृत्यु हुई, जो व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रोटोकॉल में प्रणालीगत चूकों की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

यह रिपोर्ट भारत के PSU क्षेत्र में जवाबदेही की व्यापक चुनौती को रेखांकित करती है। CAG के निष्कर्ष PSU में परियोजना नियोजन, संपत्ति प्रबंधन, श्रमिक सुरक्षा और शासन मानकों में तत्काल सुधार की जरूरत बताते हैं।