वित्त वर्ष 2025-26 में 17 मार्च 2026 तक भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 7.19% बढ़कर ₹22.80 लाख करोड़ हो गया। कॉर्पोरेट और गैर-कॉर्पोरेट करों की वसूली बढ़ने से कुल संग्रह में यह वृद्धि हुई। परीक्षा की दृष्टि से यह आँकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्यक्ष कर संग्रह से सरकार की राजस्व क्षमता, औपचारिक आर्थिक गतिविधि की मज़बूती और राजकोषीय नीति की दिशा का पता चलता है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय का लक्ष्य ₹12.2 लाख करोड़ रखा गया और इसे अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य बताया गया। पूंजीगत व्यय पर ज़ोर से बुनियादी ढाँचे पर आधारित विकास और सार्वजनिक निवेश का महत्व सामने आता है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी में यही तथ्य राजकोषीय नीति, आर्थिक वृद्धि और सतत विकास पर उत्तर तैयार करने के लिए उपयोगी आधार देता है।

मौद्रिक नीति के मोर्चे पर RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान संशोधित कर 7.3% किया और उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर 2.0% किया। विकास को सहारा देने के लिए RBI ने नीतिगत दर 25 आधार अंक घटाकर 5.25% की। इन आँकड़ों से वृद्धि और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन तथा समष्टि आर्थिक प्रबंधन में केंद्रीय बैंक की भूमिका समझी जा सकती है।

गोल्डमैन सैक्स ने 2026 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि सालाना आधार पर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है। लगभग 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को भी समष्टि आर्थिक स्थिरता का सहारा बताया गया है। इन सभी बातों को साथ पढ़ने पर प्रत्यक्ष कर, बजट, RBI की नीति, GDP वृद्धि और विदेशी मुद्रा भंडार की एक परीक्षा-उपयोगी आर्थिक तस्वीर बनती है। प्रारंभिक परीक्षा में इन आँकड़ों पर प्रश्न आ सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में राजकोषीय-मौद्रिक समन्वय और विकास की निरंतरता का विश्लेषण किया जा सकता है।