भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि कुल बैंक जमा में चालू खाता और बचत खाता (कासा) जमा की हिस्सेदारी दिसंबर 2025 तिमाही में गिरकर दो साल के निचले स्तर 37.9% पर आ गई, जबकि दिसंबर 2023 में यह 40.1% थी। बचत खातों का हिस्सा 210 आधार अंक गिरकर 28.9% पर आ गया।
यह गिरावट घरेलू बचत के तरीके में संरचनात्मक बदलाव दिखाती है। जमाकर्ता अब अपने पैसे को इक्विटी, म्यूचुअल फंड और सोने जैसे अधिक रिटर्न देने वाले साधनों की ओर तेजी से ले जा रहे हैं। भारत के घरेलू म्यूचुअल फंड उद्योग ने 2025-26 में 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमतें 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गई हैं।
इस निकासी के जवाब में बैंकों ने आक्रामक रूप से जमा प्रमाणपत्र (सीडी) जारी किए हैं। वित्त वर्ष 2026 में इनका कुल निर्गम रिकॉर्ड 15.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। घटता कासा अनुपात बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन पर दबाव डालता है, क्योंकि ऋण मांग पूरी करने के लिए उन्हें अधिक महंगे थोक फंडिंग स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
बैंकिंग विश्लेषकों का कहना है कि वित्तीय साक्षरता में सुधार और खुदरा निवेशकों को विविध निवेश प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलने के साथ यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने इस स्थिति को वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम बताया है और बैंकों से अपनी देनदारी प्रबंधन रणनीतियां मजबूत करने तथा खुदरा ग्राहकों को बनाए रखने के लिए नए जमा उत्पाद विकसित करने का आग्रह किया है।
