भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को अपना संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) सौंपा है। यह दस्तावेज़ ब्राज़ील के बेलेम में होने वाले COP30 सम्मेलन से पहले जमा किया गया है। संशोधित NDC में भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती का लक्ष्य रखा है, जो पहले के 45% लक्ष्य से अधिक महत्वाकांक्षी है। साथ ही, 2035 तक कुल विद्युत स्थापित क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है, जो पहले 50% था।

संशोधित NDC में सभी ग्रीनहाउस गैसों को शामिल किया गया है — CO2, CH4, N2O, HFCs, PFCs और SF6। इसमें वन एवं वृक्ष आवरण के विस्तार से 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन CO2 समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का प्रावधान भी है। यह NDC COP26 ग्लासगो में घोषित भारत की पंचामृत प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, जिसमें 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने इसे जमा किया। यह कदम विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई में भारत की अग्रणी भूमिका को दर्शाता है।