17 नवंबर 2025 को ब्राज़ील के बेलेम में COP30 में संयुक्त राष्ट्र समर्थित 'ग्लोबल मीथेन स्टेटस रिपोर्ट 2025' जारी की गई, जिसमें भारत को फसल अवशेष जलाने (पराली जलाने) से होने वाले मीथेन उत्सर्जन का एक महत्वपूर्ण वैश्विक हॉटस्पॉट बताया गया। भारत चीन और अमेरिका के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मीथेन उत्सर्जक है, जो प्रति वर्ष लगभग 310 लाख टन मीथेन उत्सर्जित करता है। G20 देश मिलकर वैश्विक मीथेन उत्सर्जन का 65% उत्पन्न करते हैं। भारत का कृषि मीथेन — पशुधन (प्राथमिक स्रोत), धान की खेती और पराली जलाने से — वैश्विक कृषि मीथेन का लगभग 12% है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन से फसल पैटर्न में बदलाव के कारण 2030 तक धान की खेती से मीथेन उत्सर्जन 8% बढ़ सकता है। COP30 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के राष्ट्रीय वक्तव्य में मीथेन का कोई उल्लेख नहीं था, जो भारत के NDC में मीथेन के लिए अलग नीति-ढाँचे के अभाव को दर्शाता है। भारत ने 2030 तक मीथेन उत्सर्जन 30% कम करने के 'ग्लोबल मीथेन प्लेज' पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। रिपोर्ट ने विकेंद्रीकृत बायोगैस और सीबीजी बुनियादी ढाँचे में निवेश की सिफारिश की।