राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 8 अप्रैल 2026 को बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गुहाता गांव का दौरा कर राम जल सेतु लिंक परियोजना के तहत निर्माणाधीन चंबल जल सेतु का निरीक्षण किया। राम जल सेतु लिंक परियोजना, राजस्थान सरकार द्वारा पार्वती-कालीसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी) को दिया गया नया नाम है। यह जल सेतु कोटा जिले की डिगोद तहसील के पिपलदा सामेल गांव से बूंदी जिले के गुहाता गांव के बीच चंबल नदी पर बनेगा, जिसकी कुल लंबाई 2,280 मीटर है। इसे 5,060 पाइल, 77 पाइल कैप तथा लगभग 384 वृत्ताकार पियर्स का सहारा मिलेगा, और इसके ऊपर बनने वाली 7 मीटर चौड़ी सड़क कोटा और दिल्ली के बीच स्थानीय संपर्क को बेहतर बनाएगी। मुख्यमंत्री ने परियोजना को विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया तथा कहा कि राज्य सरकार जल-संबंधी सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2024 में केंद्रीय वित्त पोषण के साथ राष्ट्रीय परियोजना के रूप में अनुमोदित किया था, जिससे मूल ईआरसीपी का दायरा बढ़ा। अपने पहले चरण में परियोजना का लक्ष्य पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लगभग 3.25 करोड़ लोगों को पेयजल तथा एमओए के अनुसार राजस्थान में 4.03 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई लाभ देना है। इन जिलों में झालावाड़, कोटा, बारां, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, दौसा, जयपुर, अजमेर और टोंक सहित अन्य जिले शामिल हैं। चंबल जल सेतु का यह निरीक्षण 2028 से पहले परियोजना को समय पर पूरा कराने के मुख्यमंत्री के प्रयास का हिस्सा है।