प्रकाशित: 22 मार्च 2026समाचार स्रोतपर्यावरण
विश्व जल दिवस 2026: 'जल और लिंग' विषय, भारत ने जल जीवन मिशन और जल संरक्षण के पारंपरिक ज्ञान पर ज़ोर दिया
22 मार्च 2026 को विश्व जल दिवस 'जल और लिंग' विषय और अभियान के नारे 'जहाँ जल बहता है, वहाँ समानता बढ़ती है' के साथ मनाया गया। 1993 से हर साल मनाए जाने वाले संयुक्त राष्ट्र के इस दिवस में इस बार पानी लाने की ज़िम्मेदारी महिलाओं और लड़कियों पर कहीं अधिक पड़ने तथा टिकाऊ जल प्रबंधन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर ध्यान दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से जल संरक्षण के तरीके अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि भारत में दुनिया की लगभग 18% आबादी रहती है, जबकि उसे दुनिया के मीठे पानी का केवल लगभग 4% हिस्सा उपलब्ध है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1950 के 5,200 घन मीटर से घटकर 2024 में लगभग 1,400–1,500 घन मीटर रह गई है और अब यह जल-संकट की 1,000 घन मीटर की सीमा के करीब है।
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्रालय ने प्रमुख आँकड़े जारी किए, जिनमें 7वीं लघु सिंचाई जनगणना, जल निकायों की दूसरी जनगणना, झरनों की पहली जनगणना और राष्ट्रीय जल डेटा नीति 2026 शामिल हैं। जल जीवन मिशन ने 15.8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित नल-जल कनेक्शन दिए हैं। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI), भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (ASSOCHAM) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने 2030 तक शून्य तरल अपशिष्ट मानक का पालन करने की प्रतिज्ञा की।
राजस्थान के संदर्भ में: भूजल के तेज़ी से घटते स्तर की समस्या में राजस्थान प्रमुखता से सामने आता है और पंजाब तथा हरियाणा के साथ देश के सबसे अधिक जल-संकट वाले राज्यों में गिना जाता है। राज्य में पानी सहेजने की पारंपरिक व्यवस्थाएँ हैं—जोहड़ (भूजल भंडार को फिर से भरने वाले मिट्टी के बाँध), टांका या कुंड (घरों में बने भूमिगत जलाशय) और बावड़ी (सीढ़ीदार कुएँ)। इन्हें जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन के वैश्विक मॉडल के रूप में रेखांकित किया गया। राजेंद्र सिंह ने जोहड़ों के निर्माण से राजस्थान की अरवरी नदी को पुनर्जीवित किया; इसे सामुदायिक जल संरक्षण की सफल मिसाल बताया गया। विश्व जल दिवस सम्मेलन 2026 का आयोजन 23 मार्च को नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में होना तय था।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: जल जीवन मिशन और राजस्थान में पानी सहेजने की पारंपरिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में भारत की जल सुरक्षा के लिए विश्व जल दिवस 2026 के विषय 'जल और लिंग' के महत्व पर चर्चा करें।
उत्तर (50 शब्द):
22 मार्च 2026 को विश्व जल दिवस 'जल और लिंग' विषय पर मनाया गया। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1950 के 5,200 घन मीटर से घटकर 2024 में लगभग 1,400 घन मीटर रह गई। जल जीवन मिशन ने 15.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल-जल से जोड़ा है, जबकि राजस्थान के जोहड़, टांका और बावड़ी वैश्विक संरक्षण मॉडल हैं।
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जुड़ा प्रश्नआसान
विश्व जल दिवस 2026 का विषय क्या था?
व्याख्या · सही उत्तर Aविश्व जल दिवस 2026 'जल और लिंग' विषय पर मनाया गया, जो जल शासन और लैंगिक समानता के अंतर्संबंध को रेखांकित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व जल दिवस 2026 का विषय क्या था और यह हर साल कब मनाया जाता है?
विश्व जल दिवस 2026 का विषय 'जल और लिंग' था। यह 1993 से हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव A/RES/47/193 के बाद हुई, जिसमें मीठे पानी के महत्व को स्वीकार किया गया और दुनिया भर में कदम उठाने का आह्वान किया गया।
1950 के बाद से भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता कितनी बदली है और यह क्या संकेत देती है?
भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1950 के लगभग 5,200 घन मीटर से घटकर 2024 में लगभग 1,400 घन मीटर रह गई है। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आई यह तेज़ गिरावट भारत को जल-संकट वाले देशों की श्रेणी में रखती है, जहाँ प्रति व्यक्ति उपलब्धता 1,700 घन मीटर से कम होती है। इससे जल संरक्षण और पानी की मांग के बेहतर प्रबंधन की तत्काल ज़रूरत स्पष्ट होती है।
जल जीवन मिशन क्या है और इसने अब तक क्या हासिल किया है?
2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन (JJM) का लक्ष्य देश के हर ग्रामीण परिवार को उसके घर में नल से पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। 2024 तक 15.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन मिल चुके हैं। इससे जल-संकट वाले क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाला पानी लाने का बोझ काफी कम हुआ है।
राजस्थान की उन तीन पारंपरिक जल संरचनाओं के नाम बताइए जिन्हें वैश्विक संरक्षण मॉडल माना जाता है।
राजस्थान की तीन पारंपरिक जल संरचनाएँ वैश्विक संरक्षण मॉडल मानी जाती हैं: (1) जोहड़—मिट्टी के बाँध, जो भूजल को फिर से भरते हैं; (2) टांका—छत से इकट्ठे वर्षा जल को घरेलू उपयोग के लिए सहेजने वाला भूमिगत कुंड; और (3) बावड़ी—कई स्तरों वाली प्राचीन सीढ़ीदार संरचना, जिससे भूजल का उपयोग किया जाता है। समुदायों की देखरेख में चलने वाली इन व्यवस्थाओं ने सदियों से शुष्क राजस्थान में जीवन को सहारा दिया है।
दुनिया भर में पानी से जुड़ी चर्चा में लिंग समानता को केंद्रीय विषय क्यों बनाया गया है?
जल-संकट वाले क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में, महिलाओं और लड़कियों को पानी लाने के लिए अक्सर रोज़ कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई या आर्थिक गतिविधियों में लग सकने वाला समय छिन जाता है और गरीबी तथा असमानता का चक्र चलता रहता है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से घर के पास पानी उपलब्ध होना लिंग समानता को सीधे बढ़ावा देता है। इसीलिए विश्व जल दिवस 2026 के विषय में जल और लिंग को खास तौर पर जोड़ा गया।