राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 7 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि वे बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील के गुहाटा गांव जाकर निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण करेंगे। यह संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना का एक महत्वपूर्ण अभियांत्रिकी घटक है। यह एक्वाडक्ट चंबल नदी पर लगभग 2,280 मीटर लंबा होगा और कोटा जिले की डिगोद तहसील के पीपलदा सामेल गांव को बूंदी जिले के गुहाटा गांव से जोड़ेगा। इसका निर्माण राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधीन किया जा रहा है। यह परियोजना व्यापक राम जल सेतु लिंक परियोजना (आरएसएलपी) का हिस्सा है, जो पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) का नया नाम और विस्तारित रूप है। राज्य सरकार ने जनवरी 2025 में इसका औपचारिक रूप से नया नामकरण किया था। भजनलाल शर्मा सरकार ने इस योजना को पूर्वी राजस्थान के लिए परिवर्तनकारी पहल मानते हुए प्राथमिकता दी है। इसके पहले चरण में लगभग 3.25 करोड़ लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने और राज्य के 17 जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। व्यापक संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी लिंक परियोजना की कुल लंबाई लगभग 1,000 किलोमीटर होगी, जिसमें 595 किलोमीटर राजस्थान में और 405 किलोमीटर मध्य प्रदेश में होगी। इसमें 12 बांध, 10 बैराज, 7 सुरंगें तथा 22 एक्वाडक्ट होंगे। पानी पहुंचाने के साथ-साथ यह एक्वाडक्ट जन परिवहन मार्ग के रूप में भी काम आएगा, जिससे क्षेत्र में स्थानीय आवागमन बेहतर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा पुराने जल-संकट से जूझ रहे पूर्वी जिलों में जल बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री राम जल सेतु लिंक परियोजना के अंतर्गत बूंदी में चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण करेंगे
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बूंदी में 2,280 मीटर लंबे चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण करेंगे, जो संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी (राम जल सेतु) लिंक परियोजना के अंतर्गत है। इससे 17 पूर्वी जिलों को लाभ मिलेगा और लगभग 3.25 करोड़ लोगों को पेयजल उपलब्ध होगा।
मुख्य तथ्य
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 8 अप्रैल को बूंदी के गुहाटा गांव जाकर 2,280 मीटर लंबे चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण करेंगे।
- एक्वाडक्ट कोटा जिले के पीपलदा सामेल को बूंदी के गुहाटा से जोड़ेगा और संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना का हिस्सा है।
- परियोजना का क्रियान्वयन राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड कर रहा है।
- यह राम जल सेतु लिंक परियोजना (पुनर्नामित ईआरसीपी) के अंतर्गत है और इसमें 17 पूर्वी जिले शामिल होंगे।
- संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी की कुल लंबाई लगभग 1,000 किमी होगी, जिसमें 12 बांध, 10 बैराज, 7 सुरंगें और 22 एक्वाडक्ट शामिल होंगे।
- पहले चरण में लगभग 3.25 करोड़ लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
6-अक्ष वर्गीकरण
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हाल ही में चर्चा में रहा चंबल एक्वाडक्ट राजस्थान की किस जल संसाधन परियोजना का एक महत्वपूर्ण घटक है?
अप्रैल 2026 में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बूंदी जिले में चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण किया। यह संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना का प्रमुख अभियांत्रिकी घटक है। राज्य सरकार ने इसी परियोजना को रामजल सेतु लिंक परियोजना नाम दिया है; यह मूल ईआरसीपी का विस्तारित संस्करण है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राम जल सेतु लिंक परियोजना क्या है?
यह राजस्थान सरकार द्वारा जनवरी 2025 में संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-पूर्वी राजस्थान नहर (पीकेसी-ईआरसीपी) लिंक परियोजना को दिया गया नया नाम है, जो पूर्वी राजस्थान के लिए एक प्रमुख अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो पहल है।
चंबल एक्वाडक्ट कितना लंबा है?
चंबल एक्वाडक्ट चंबल नदी के आर-पार लगभग 2,280 मीटर लंबा है और कोटा जिले के पीपलदा सामेल गांव को बूंदी जिले के गुहाटा गांव से जोड़ता है।
इस परियोजना से कितने जिलों को लाभ होगा?
राम जल सेतु लिंक परियोजना पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को लाभान्वित करेगी और पहले चरण में लगभग 3.25 करोड़ लोगों को पेयजल प्रदान करेगी।
परियोजना का क्रियान्वयन कौन-सी एजेंसी कर रही है?
राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी लिंक परियोजना के तहत चंबल एक्वाडक्ट का क्रियान्वयन कर रहा है।
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