सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को मार्च 2026 का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आँकड़ा जारी किया। भारतीय रिज़र्व बैंक ने 8 अप्रैल को अपना तटस्थ नीतिगत रुख बनाए रखा था; उसके बाद जारी हुआ यह पहला मासिक सीपीआई आँकड़ा है। मार्च का आँकड़ा भारत की आर्थिक नीति के लिए अहम समय पर आया है। अर्थशास्त्री यह देख रहे हैं कि पश्चिम एशिया में व्यवधान के कारण बढ़ी ईंधन लागत और खाद्य कीमतों में फिर आई तेज़ी ने खुदरा महंगाई को बढ़ाया है या नहीं। फरवरी 2026 के पिछले आँकड़ों में समग्र सीपीआई महंगाई दर जनवरी के 2.74 प्रतिशत से बढ़कर सालाना आधार पर 3.21 प्रतिशत हो गई थी, जबकि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) 3.47 प्रतिशत तक पहुँच गया था। रॉयटर्स के 13 अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण ने मार्च के लिए औसत सीपीआई महंगाई दर लगभग 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। इसके पीछे खाद्य श्रेणियों में रमज़ान से जुड़ी मांग के आधार प्रभाव, कच्चे तेल की लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल की ऊँची कीमत और कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार तेज़ी को कारण माना गया था। कीमती धातुओं की तेज़ी से व्यक्तिगत देखभाल और निजी उपयोग की वस्तुओं का उप-सूचकांक बढ़ा। एमओएसपीआई के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय सीपीआई का संकलन करता है। यह खाद्य एवं पेय, पान-तंबाकू, कपड़े एवं जूते, आवास और विविध—इन पाँच प्रमुख समूहों की 290 से अधिक वस्तुओं के खुदरा दामों में बदलाव को मापता है। यह आँकड़ा नई 2024=100 आधार श्रृंखला पर जारी किया गया है, जिसमें खाद्य वस्तुओं का भार घटाया गया और ई-कॉमर्स को शामिल किया गया। भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 में सीपीआई महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह उसके 2-6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर है। मार्च का आँकड़ा जून 2026 में होने वाली समिति की अगली बैठक से जुड़ी अपेक्षाओं को प्रभावित करेगा।