प्रकाशित: 31 अगस्त 2025PIBअर्थव्यवस्था
GST 2.0 का राजस्थान के औद्योगिक और वस्त्र क्षेत्र पर प्रभाव
22 सितंबर 2025 से GST 2.0 लागू होने पर राजस्थान के प्रमुख उद्योगों, विशेष रूप से वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। दो दरों वाली नई संरचना के तहत परिधान और वस्त्रों को 18% मानक स्लैब में रखा गया है, जो पहले की जटिल बहु-दर प्रणाली की जगह लेता है। पहले की प्रणाली भीलवाड़ा, जयपुर और सूरत व्यापार गलियारों के आसपास केंद्रित राजस्थान के बड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) वस्त्र समूह के लिए अनुपालन में गंभीर कठिनाइयां पैदा करती थी।
राजस्थान के हस्तशिल्प और रत्न उद्योग राज्य के निर्यात राजस्व में बड़ा योगदान देते हैं। इनके लिए संशोधित GST संरचना कीमत तय करने में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता देती है। 12% स्लैब को पूरी तरह हटाने से इस क्षेत्र में पहले आम रहे वर्गीकरण विवाद काफी हद तक कम होते हैं, क्योंकि उत्पाद अक्सर कई दर श्रेणियों के बीच आते थे। केवल हस्तशिल्प क्षेत्र राजस्थान में 4 लाख से अधिक कुशल कारीगरों को रोजगार देता है, जो मुख्य रूप से जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जिलों में केंद्रित हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस सरल दो-दर संरचना से राज्य की नई राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के तहत प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों में अधिक घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान को देश के अग्रणी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की है, और GST का यह सरलीकरण नई विनिर्माण इकाइयों के लिए अनुपालन से जुड़ी एक बड़ी बाधा को प्रभावी रूप से दूर करता है।
राजस्थान सरकार का अनुमान है कि GST 2.0 से अनौपचारिक क्षेत्र में कर चोरी कम होने और कर अनुपालन बेहतर होने के कारण राज्य GST संग्रह में लगभग 8-10 प्रतिशत की वृद्धि होगी। राज्य का अनौपचारिक क्षेत्र कुल विनिर्माण उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 22 सितंबर 2025 से लागू माल एवं सेवा कर (जीएसटी) 2.0 की दो-दर संरचना राजस्थान के कपड़ा एवं हस्तशिल्प समूहों को किस प्रकार पुनर्गठित करेगी, चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
परिधान अब 18 प्रतिशत की मानक दर के दायरे में है, जिससे भीलवाड़ा, जयपुर एवं जोधपुर के एमएसएमई समूहों को बहु-दर बोझ से राहत मिलेगी। चार लाख कारीगरों वाला हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र कीमतों में स्पष्टता पाएगा। अनौपचारिक क्षेत्र में अनुपालन सुधरने से राज्य को जीएसटी संग्रह में आठ-दस प्रतिशत वृद्धि की आशा है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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जुड़ा प्रश्नआसान
GST 2.0 के तहत, राजस्थान में वस्त्र और परिधान किस दर के अंतर्गत रखे गए हैं?
व्याख्या · सही उत्तर AGST 2.0 की दो-दर संरचना के तहत, परिधान और वस्त्रों को 18% मानक स्लैब में वर्गीकृत किया गया है। यह पहले की जटिल बहु-दर प्रणाली की जगह लेता है जो भीलवाड़ा, जयपुर और सूरत व्यापार गलियारों में MSME वस्त्र समूहों के लिए अनुपालन कठिनाइयां पैदा करती थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
GST 2.0 क्या है और इसकी दर संरचना मूल GST से किस प्रकार भिन्न है?
GST 2.0 में मौजूदा बहु-स्लैब GST ढाँचे को एक सरल दो-दर प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव है। इससे मूल चार-स्लैब GST (5%, 12%, 18%, 28%) के तहत व्यवसायों को होने वाले वर्गीकरण विवाद और अनुपालन जटिलता कम होगी।
GST 2.0 से राजस्थान के वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र को विशेष रूप से क्या लाभ होगा?
बागरू और सांगानेर के ब्लॉक प्रिंट कपड़ों तथा हथकरघा बुनकर समूहों सहित राजस्थान के वस्त्र और हस्तशिल्प उद्योगों को मौजूदा GST में कई दरों वाले जटिल वर्गीकरण से जूझना पड़ता है। प्रस्तावित दो-दर संरचना से वर्गीकरण संबंधी विवाद कम होंगे और छोटे कारीगरों के लिए रिटर्न भरना आसान होगा।
भारत के रत्न क्षेत्र में राजस्थान की क्या भूमिका है और GST 2.0 इसे कैसे प्रभावित करता है?
जयपुर रंगीन रत्नों की कटाई और पॉलिशिंग का विश्व का सबसे बड़ा केंद्र है। रत्न क्षेत्र में अभी कच्चे और प्रसंस्कृत पत्थरों के वर्गीकरण को लेकर GST में अस्पष्टता रहती है। GST 2.0 की सरलीकृत दर संरचना से जयपुर के रत्न व्यापारियों पर अनुपालन बोझ कम होने की उम्मीद है।
राजस्थान के पारंपरिक कारीगर क्षेत्र के लिए अनुपालन बोझ कम करना क्यों महत्वपूर्ण है?
राजस्थान का कारीगर क्षेत्र, जिसमें कुम्हार, बुनकर, चर्मशिल्पी और ब्लॉक प्रिंट करने वाले कारीगर शामिल हैं, मुख्यतः सूक्ष्म और लघु उद्यमों से बना है। इनके पास लेखांकन क्षमता सीमित होती है। सरलीकृत GST ढाँचा अनुपालन लागत घटाता है, कर सलाहकारों पर निर्भरता कम करता है और कारीगरों को उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
GST 2.0 राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को कैसे बढ़ाता है?
कर जटिलता और वर्गीकरण विवादों को कम करके GST 2.0 राजस्थान के औद्योगिक और MSME क्षेत्रों को गुजरात और महाराष्ट्र जैसे विनिर्माण केंद्रों से प्रभावी प्रतिस्पर्धा करने में मदद करता है। अनुपालन लागत कम होने से पूंजी पुनर्निवेश के लिए बचती है, जिससे राज्य के राइजिंग राजस्थान औद्योगिक विकास लक्ष्य को बढ़ावा मिलता है।