GST मूल बातें: अर्थ, संरचना, दरें, GST परिषद एवं प्रमुख प्रावधान
मुख्य तथ्य
- GST भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाने वाला व्यापक, बहु-चरणीय, गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है।
- संवैधानिक आधार: 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 ने अनुच्छेद 246A (संसद एवं राज्य विधानमंडलों को GST पर विधान का अधिकार), अनुच्छेद 269A (IGST), अनु...
- GST दर स्लैब (2024 तक): 0% (अनाज, ताज़ी सब्जियाँ), 5% (खाद्य तेल, चीनी, कोयला), 12% (प्रसंस्कृत खाना, कंप्यूटर), 18% (अधिकांश सेवाएँ, FMCG), 28% (विला...
- GST परिषद (अनुच्छेद 279A): संवैधानिक निकाय
- GSTN: एक गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी कंपनी (2013 में निगमित) जो GST का IT आधार प्रदान करती है।
मुख्य बिंदु
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GST भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाने वाला व्यापक, बहु-चरणीय, गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है। इसने 17 से अधिक केंद्रीय एवं राज्य करों को प्रतिस्थापित किया। 1 जुलाई 2017 से लागू।
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संवैधानिक आधार: 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 ने अनुच्छेद 246A (संसद एवं राज्य विधानमंडलों को GST पर विधान का अधिकार), अनुच्छेद 269A (IGST), अनुच्छेद 279A (GST परिषद) अंतःस्थापित किए।
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दोहरी GST संरचना: केंद्र और राज्य एक साथ कर लगाते हैं। चार घटक: (i) CGST — केंद्र द्वारा; (ii) SGST — राज्य द्वारा; (iii) IGST — अंतर-राज्य आपूर्ति पर; (iv) UTGST — बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए।
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GST दर स्लैब (2024 तक): 0% (अनाज, ताज़ी सब्जियाँ), 5% (खाद्य तेल, चीनी, कोयला), 12% (प्रसंस्कृत खाना, कंप्यूटर), 18% (अधिकांश सेवाएँ, FMCG), 28% (विलासिता वस्तुएँ, सीमेंट, तंबाकू) + उपकर।
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GST परिषद (अनुच्छेद 279A): संवैधानिक निकाय — केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्ष, राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य। दरें, छूट, सीमाएँ तय करती है। निर्णय 3/4 भारित बहुमत से (केंद्र = 1/3 भार; सभी राज्य = 2/3 भार)।
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इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): पंजीकृत व्यवसाय इनपुट (खरीद) पर चुकाए GST को आउटपुट (बिक्री) पर देय GST से घटा सकते हैं। इससे करों का कैस्केडिंग प्रभाव समाप्त होता है।
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GSTN: एक गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी कंपनी (2013 में निगमित) जो GST का IT आधार प्रदान करती है। शेयरधारक: केंद्र (24.5%), राज्य (24.5%), निजी वित्तीय संस्थान (51%)।
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कम्पोजीशन स्कीम: ₹1.5 करोड़ तक के सालाना कारोबार वाले छोटे व्यवसायों के लिए। फ्लैट दर — निर्माता/व्यापारी 1%, रेस्तराँ 5%, सेवाएँ 6%। ITC नहीं मिलती। तिमाही रिटर्न।
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GST पंजीकरण सीमा: ₹40 लाख से अधिक (वस्तुएँ) या ₹20 लाख (सेवाएँ)। कुछ व्यवसायों को कारोबार सीमा की परवाह किए बिना पंजीकरण अनिवार्य — ई-कॉमर्स, अंतर-राज्य आपूर्तिकर्ता।
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प्रमुख GST रिटर्न: GSTR-1 (बाहरी आपूर्ति), GSTR-3B (मासिक सारांश), GSTR-9 (वार्षिक), GSTR-9C (मिलान विवरण), GSTR-10 (अंतिम रिटर्न)।
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ई-वे बिल: ₹50,000 से अधिक मूल्य की वस्तुओं के परिवहन के लिए अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक वेबिल। ई-वे बिल पोर्टल पर उत्पन्न। ≤100 किमी = 1 दिन वैध।
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राजस्थान पर GST का प्रभाव: राजस्थान एक उपभोग राज्य है — गंतव्य-आधारित सिद्धांत उपभोग राज्यों के पक्ष में है। राजस्थान का GST राजस्व 2017-18 में ~₹20,000 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ~₹50,000 करोड़ हो गया।
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परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
GST की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि यह है कि भारत ने 1 जुलाई 2017 से पहले की बिखरी हुई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को हटाकर वस्तु और सेवा की आपूर्ति पर एक साझा, गंतव्य-आधारित कर ढाँचा लागू किया। पीआईबी के अनुसार GST ने 17 बड़े करों और 13 उपकरों को समाहित किया, इसलिए इसे केवल नया कर नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का बड़ा पुनर्गठन माना जाता है।
1.1 GST से पूर्व अप्रत्यक्ष कर की जटिलता
1 जुलाई 2017 से पहले भारत में एक खंडित, बहु-स्तरीय अप्रत्यक्ष कर प्रणाली थी:
GST द्वारा प्रतिस्थापित केंद्रीय कर:
- केंद्रीय उत्पाद शुल्क (विनिर्माण पर)
- सेवा कर (सेवाओं पर)
- केंद्रीय बिक्री कर (अंतर-राज्यीय व्यापार पर)
- अतिरिक्त सीमा शुल्क (प्रतिपूरक शुल्क और विशेष अतिरिक्त शुल्क)
- सीमा शुल्क का विशेष अतिरिक्त शुल्क
GST द्वारा प्रतिस्थापित राज्य कर:
- मूल्य वर्धित कर (वैट) - राज्य स्तरीय बिक्री कर
- ओक्ट्रॉय और प्रवेश कर
- मनोरंजन कर (स्थानीय निकाय करों को छोड़कर)
- विलासिता कर
- क्रय कर
पुरानी व्यवस्था की समस्याएँ:
1. संचयी प्रभाव (कर पर कर): विनिर्माण पर उत्पाद शुल्क + बिक्री पर वैट = एक ही मूल्य पर दोहरा कराधान
2. अधिक अनुपालन लागत: व्यवसायों को विभिन्न करों के लिए अलग-अलग पंजीकरण रखने पड़ते थे
3. अंतर-राज्यीय व्यापार बाधाएँ: अंतर-राज्यीय बिक्री पर केंद्रीय बिक्री कर 2% की दर से बाधाएँ उत्पन्न करता था
4. ओक्ट्रॉय चेकपोस्ट: ट्रक आवाजाही में देरी — ट्रकिंग समय का अनुमानित 30% राज्य सीमाओं पर नष्ट होता था
5. राज्यों में अलग-अलग दरें: एक ही वस्तु पर विभिन्न राज्यों में अलग वैट दरें
1.2 GST तक की यात्रा
GST की यात्रा के प्रमुख पड़ाव:
- 2000: GST पर पहली चर्चा — अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने राज्य वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति गठित की।
- 2006: वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्रीय बजट में 1 अप्रैल 2010 से GST लागू करने का लक्ष्य घोषित किया।
- 2009: अधिकार प्राप्त समिति ने GST पर प्रथम चर्चा पत्र जारी किया।
- 2014: एनडीए सरकार ने संविधान (122वाँ संशोधन) विधेयक, 2014 लोकसभा में प्रस्तुत किया।
- 2016: 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पारित हुआ जिसमें अनुच्छेद 246क, 269क एवं 279क सम्मिलित किए गए।
- 2017: GST को "एक राष्ट्र, एक कर" के नारे के साथ 1 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को संसद के केंद्रीय हॉल से लागू किया गया।
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15MGST क्या है? इसके द्वैध ढाँचे को चार घटकों सहित समझाइए।
मॉडल उत्तर
GST, 1 जुलाई 2017 को लागू (101वाँ संविधान संशोधन), एक बहु-चरणीय, गन्तव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है। चार घटक: (i) CGST — राज्य के भीतर आपूर्ति पर केन्द्रीय कर; (ii) SGST — राज्य के भीतर आपूर्ति पर राज्य कर; (iii) IGST — अन्तर-राज्यीय आपूर्ति पर केन्द्र संग्रह करता है, उपभोग करने वाले राज्य को वितरित; (iv) UTGST — विधानमण्डल रहित केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए।
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