सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की 'भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026' रिपोर्ट परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पर्यावरण को केवल एक अलग विषय नहीं मानती, बल्कि जलवायु जोखिम, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शासन से जोड़ती है। रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में जनवरी से नवंबर तक 99% दिनों में भारत में कहीं-न-कहीं चरम मौसम की घटना दर्ज हुई। इसमें बाढ़, लू, शीत लहर और वायु प्रदूषण के प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्ट सरकारी डेटा स्रोतों को संकलित और विश्लेषित करके पर्यावरण की स्थिति को आँकड़ों के साथ सामने रखती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए सबसे सीधा तथ्य रिपोर्ट का प्रकाशन करने वाला संगठन, रिपोर्ट का नाम, समय-अवधि और 99% दिनों वाला निष्कर्ष है। पर्यावरण और पारिस्थितिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा समसामयिकी के प्रश्नों में ऐसे तथ्य एक-कथन, दो-कथन या रिपोर्ट-संगठन मिलान के रूप में पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसी आधार पर जलवायु अनुकूलन, शहरी नियोजन, स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के असर, बाढ़ और लू जैसी आपदाओं की तैयारी तथा डेटा-आधारित नीति-निर्माण पर प्रश्न बन सकते हैं।
स्टैटिक जीके से इसका लिंक जलवायु परिवर्तन, चरम मौसम, प्रदूषण नियंत्रण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और पर्यावरणीय शासन से बनता है। रिपोर्ट का मूल संदेश यह है कि चरम मौसम अब छिटपुट घटना नहीं रहा; जनवरी से नवंबर 2025 की अवधि में यह लगभग रोज़ दर्ज हुआ। इसलिए इस विषय को केवल समसामयिकी तथ्य की तरह नहीं, बल्कि भारत की विकास-नीति, स्वास्थ्य सुरक्षा और जलवायु-लचीलापन की बहस के हिस्से के रूप में पढ़ना चाहिए।
