भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित पार्वती-अर्गा पक्षी अभयारण्य को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह घोषणा की। यह विषय पर्यावरण और भूगोल, दोनों की राष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभयारण्य 1,084 हेक्टेयर में फैला है और रामसर-सूचीबद्ध आर्द्रभूमि स्थल है। इसके रामसर स्थल का क्षेत्रफल 722.8 हेक्टेयर दर्ज है।
पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र का उद्देश्य अभयारण्य के आसपास जैव विविधता की सुरक्षा को मजबूत करना और जिम्मेदार पारिस्थितिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। परीक्षा की दृष्टि से यह मामला इसलिए उपयोगी है कि इसमें संरक्षित क्षेत्र, आर्द्रभूमि संरक्षण, रामसर स्थल और विकास गतिविधियों के नियमन जैसे विषय एक साथ आते हैं। प्रीलिम्स में स्थान, राज्य, क्षेत्रफल, रामसर स्थिति और घोषणा करने वाले मंत्री जैसे सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे आर्द्रभूमि संरक्षण, स्थानीय विकास और पारिस्थितिक संरक्षण एवं जिम्मेदार पर्यटन के बीच संतुलन — इन तीनों उदाहरणों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। RAS और UPSC जैसे पेपरों में यह तथ्य राष्ट्रीय समसामयिकी के साथ-साथ पर्यावरण और भूगोल के स्टैटिक हिस्से से भी जुड़ता है।
स्टैटिक जीके से इसका संबंध रामसर कन्वेंशन, भारत के आर्द्रभूमि प्रबंधन और संरक्षित क्षेत्रों के आसपास बनाए जाने वाले पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों से है। याद रखने योग्य तथ्य हैं: यह अभयारण्य गोंडा, उत्तर प्रदेश में है; यह एक रामसर-सूचीबद्ध आर्द्रभूमि स्थल है; अभयारण्य का क्षेत्रफल लगभग 1,084 हेक्टेयर है; इसके रामसर स्थल का क्षेत्रफल 722.8 हेक्टेयर है; और इसका पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र दर्जा जैव विविधता संरक्षण तथा जिम्मेदार पारिस्थितिक पर्यटन से जुड़ा है। इस तरह यह छोटी-सी खबर संरक्षण नीति, आर्द्रभूमि और परीक्षा में पूछे जाने वाले स्थान-आधारित तथ्यों को जोड़ती है।
