PRS विधायी अनुसंधान ने दिसंबर 2025 की मासिक नीति समीक्षा प्रकाशित की। इसमें दिसंबर 2025 के अंत में संपन्न भारतीय संसद के शीतकालीन सत्र का व्यापक विश्लेषण किया गया है।

शीतकालीन सत्र 2025 में कुल 7 विधेयक पारित हुए। ऐतिहासिक मानकों की तुलना में यह अपेक्षाकृत सीमित विधायी कामकाज था। पारित प्रमुख कानून ये हैंः

1. SHANTI अधिनियम (भारत में परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति)ः परमाणु ऊर्जा के कानूनी ढाँचे में बदलाव करने वाला कानून।

2. विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम (VB-G RAM G)ः मनरेगा की जगह बेहतर ग्रामीण रोज़गार गारंटी देने वाला कानून, जिसमें 125 कार्यदिवस, 60:40 वित्त-पोषण और निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल शामिल है।

3. बीमा संशोधन विधेयकः बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने, पॉलिसियों तक पहुँच आसान बनाने और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के नियामक ढाँचे को मज़बूत करने के लिए बीमा नियमों में संशोधन।

4. स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकरः पान मसाला और अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन पर लगाया गया उपकर, जिसका उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खर्च के लिए होगा।

PRS के अनुसार, सत्र में 9 विधेयक पेश हुए और उनमें से 2 को समितियों के पास भेजा गया।

समीक्षा में यह भी बताया गया कि शीतकालीन सत्र में संसद के वास्तविक कामकाज के घंटे ऐतिहासिक औसत से कम रहे। व्यवधान और स्थगन होने से प्रभावी विधायी चर्चा का समय बहुत घट गया।

PRS ने समिति-व्यवस्था को मज़बूत करने और महत्वपूर्ण आर्थिक व सामाजिक प्रभाव वाले विधेयकों को पेश करने से पहले परामर्श अनिवार्य करने की सलाह दी।