रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में तीनों सेनाओं के लिए करीब ₹79,000 करोड़ के खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति दी। यह अपडेट 2025 के अंत की रक्षा समसामयिकी में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों की क्षमता बढ़ाने वाले अलग-अलग अधिग्रहण शामिल हैं। इसका मुख्य फोकस रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करना है।
थलसेना के लिए लोइटर म्यूनिशन, हल्के रडार, पिनाका प्रणाली के लिए लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट और ड्रोन पहचान-रोकथाम प्रणाली जैसे प्रस्ताव जुड़े हैं। परीक्षा की दृष्टि से महत्व यह है कि आधुनिक युद्ध में सटीक प्रहार, ड्रोन-रोधी सुरक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता अब मुख्य जरूरत बन रही है। नौसेना के लिए टग, सुरक्षित संचार रेडियो और ऊंची उड़ान तथा लंबी दूरी वाली दूर से संचालित विमान प्रणाली को पट्टे पर लेने का संदर्भ समुद्री क्षेत्र-जागरूकता और हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़ता है। वायुसेना के लिए स्वचालित टेक-ऑफ और लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, अस्त्र एमके-2 मिसाइलें, तेजस के लिए फुल मिशन सिम्युलेटर और स्पाइस-1000 गाइडेंस किट जैसे प्रस्ताव प्रशिक्षण, सुरक्षा और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता से जुड़े हैं।
RAS और UPSC प्रीलिम्स में इससे रक्षा अधिग्रहण परिषद, आवश्यकता की स्वीकृति, तीनों सेनाओं की भूमिका और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और तकनीक-आधारित सैन्य तैयारी के उदाहरण के रूप में उपयोगी है। ध्यान रहे कि लेख का दायरा ₹79,000 करोड़ की स्वीकृति और तीनों सेनाओं की क्षमता-वृद्धि तक सीमित है; इसे किसी अंतिम खरीद अनुबंध या डिलीवरी समयसीमा के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
