वस्त्र मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत किया और इसे विश्वास, विकास तथा साझा समृद्धि पर आधारित भविष्य-उन्मुख साझेदारी बताया। मंत्रालय ने कहा कि न्यूजीलैंड भारतीय वस्त्र, परिधान और मेड-अप्स के लिए केंद्रित बाजार है: इन श्रेणियों में आयात लगभग 33 करोड़ अमेरिकी डॉलर, 127 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 33 करोड़ अमेरिकी डॉलर हैं। करीब 53 लाख आबादी, बड़े शहरी केंद्रों और लगभग 52,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति आय के कारण यह बाजार उच्च-मूल्य भारतीय खेपों को ग्रहण कर सकता है। परिधान न्यूजीलैंड के वैश्विक वस्त्र-संबंधी आयात का 65% हैं; कैजुअल वियर, जैकेट, औपचारिक परिधान और खेल परिधान प्रमुख उप-क्षेत्र हैं। सूती परिधान परिधान आयात का 45% और मानव-निर्मित रेशा उत्पाद 36% हिस्सा हैं। विज्ञप्ति में 575 शुल्कयोग्य सर्वाधिक-वरीयता-प्राप्त-राष्ट्र शुल्क लाइनों का उल्लेख किया गया, जिनमें कुछ ऊन, मानव-निर्मित रेशा और मेड-अप्स पर 5% शुल्क तथा कालीन, कुछ मानव-निर्मित रेशा और परिधान पर 10% शुल्क है, इसलिए कम शुल्क लागत भारतीय प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ा सकती है। न्यूजीलैंड को भारत का कुल निर्यात लगभग 65 करोड़ अमेरिकी डॉलर है, जिसमें वस्त्रों का योगदान लगभग 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। मंत्रालय ने कहा कि पिछले दशक में परिधान, मेड-अप्स, कालीन, रेशा, धागा और कपड़ों में सकारात्मक रुझान दिखा है। संभावित वृद्धि क्षेत्रों में मानव-निर्मित रेशा, जूट, लिनन और ऊन से बने परिधान; मानव-निर्मित रेशा, जूट और लिनन आधारित मेड-अप्स; कालीन, रेशे, धागे, कपड़े, हस्तशिल्प और हथकरघा शामिल हैं। मंत्रालय ने वस्त्र डिजाइन घरानों और फैशन प्रौद्योगिकी संस्थानों से सहयोग का भी उल्लेख किया तथा बाजार पहुंच को निर्यात लाभ में बदलने के लिए मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी पर जोर दिया।
वस्त्र मंत्रालय ने कहा कि 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता भारतीय वस्त्र, परिधान, मेड-अप्स, कालीन, हथकरघा और डिजाइन सहयोग को बढ़ावा दे सकता है
वस्त्र मंत्रालय ने कहा कि 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता भारतीय वस्त्रों, परिधानों और मेड-अप्स को शुल्क राहत के साथ ऊंची आय वाले बाजार में पहुंच दिला सकता है। मंत्रालय ने परिधान, कालीन, रेशे, धागे, कपड़े, हस्तशिल्प और हथकरघा को वृद्धि की संभावना वाले क्षेत्र बताया तथा इस अवसर को निर्यात में बदलने के लिए डिजाइन सहयोग और मेलों में भागीदारी पर जोर दिया।
मुख्य तथ्य
- भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए।
- वस्त्र मंत्रालय ने कहा कि न्यूजीलैंड भारतीय वस्त्र, परिधान और मेड-अप्स के लिए अवसर वाला बाजार है।
- न्यूजीलैंड के वस्त्र, परिधान और मेड-अप्स आयात क्रमशः लगभग 33 करोड़ अमेरिकी डॉलर, 127 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 33 करोड़ अमेरिकी डॉलर हैं।
- परिधान न्यूजीलैंड के वैश्विक वस्त्र-संबंधी आयात का 65% है, जिसमें सूती परिधान 45% और मानव-निर्मित रेशा 36% है।
- न्यूजीलैंड में 575 शुल्कयोग्य शुल्क लाइनें हैं, जिनमें कुछ ऊन, मानव-निर्मित रेशा और मेड-अप्स पर 5% तथा कालीन, कुछ मानव-निर्मित रेशा और परिधान पर 10% शुल्क है।
- न्यूजीलैंड को भारत का कुल निर्यात लगभग 65 करोड़ अमेरिकी डॉलर है, जिसमें वस्त्रों का योगदान लगभग 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।
- मंत्रालय ने परिधान, मेड-अप्स, कालीन, रेशे, धागे, कपड़े, हस्तशिल्प, हथकरघा और डिजाइन सहयोग को उपयोगी क्षेत्र बताया।
6-अक्ष वर्गीकरण
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वस्त्र मंत्रालय के अनुसार न्यूजीलैंड को भारत के निर्यात में वस्त्र क्षेत्र का अनुमानित योगदान कितना था?
मंत्रालय ने कहा कि न्यूजीलैंड को भारत का कुल निर्यात लगभग 65 करोड़ अमेरिकी डॉलर था, जबकि वस्त्रों का हिस्सा लगभग 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। 33 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 127 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आंकड़े न्यूजीलैंड की आयात श्रेणियों से जुड़े हैं, भारत के वस्त्र निर्यात योगदान से नहीं।
स्रोत: Ministry of Textiles
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर कब हस्ताक्षर हुए?
वस्त्र मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार इस पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए।
यह समझौता वस्त्र क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण क्यों है?
यह शुल्क लागत घटाकर न्यूजीलैंड में भारतीय वस्त्र, परिधान, मेड-अप्स, कालीन और हथकरघा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकता है।
न्यूजीलैंड को भारत का वस्त्र निर्यात कितना है?
विज्ञप्ति में कहा गया कि न्यूजीलैंड को भारत का कुल निर्यात लगभग 65 करोड़ अमेरिकी डॉलर है, जिसमें वस्त्रों का हिस्सा लगभग 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।
न्यूजीलैंड के आयात में परिधान की कौन-कौन सी श्रेणियाँ महत्वपूर्ण हैं?
कैजुअल वियर, जैकेट, औपचारिक परिधान और खेल परिधान प्रमुख श्रेणियाँ हैं, जिनमें सूती परिधान और मानव-निर्मित रेशों से बने उत्पादों की हिस्सेदारी बड़ी है।
मंत्रालय ने किस गैर-शुल्क अवसर का ज़िक्र किया?
मंत्रालय ने वस्त्र डिजाइन हाउसों और फैशन प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ सहयोग तथा प्रमुख वस्त्र मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी का उल्लेख किया।
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